असम में शुक्रवार को 12 नए मंत्रियों ने पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। इससे उनकी नई कैबिनेट में मंत्रियों की कुल संख्या 17 हो गई। हिमंता कैबिनेट में कुछ नए चेहरे शामिल हैं। साथ ही इसमें कांग्रेस के उन जाने-माने पूर्व नेताओं को भी जगह दी गई है जो कुछ साल पहले सरमा के साथ बीजेपी में शामिल हुए थे।
हिमंता कैबिनेट 2.0 में शामिल कांग्रेस के इन पूर्व नेताओं में सबसे सीनियर अजंता नियोग हैं। उन्होंने पिछले महीने हिमंता बिस्वा सरमा के साथ शपथ ली थी। पीयूष हजारिका और जयंत मल्ला बरुआ को भी मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया। ये दोनों पहली बार विधायक बने थे जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और 2015 में सरमा के बीजेपी में शामिल होने के कुछ समय बाद ही बीजेपी में आ गए। बाद में दोनों कैबिनेट मंत्री बने।
मंत्रिपरिषद में शामिल होने वाले एक और नेता, सुशांत बोरगोहेन का सफर भी कुछ ऐसा ही रहा है। जब सरमा ने कांग्रेस छोड़ी थी, तब वे भी कांग्रेस से पहली बार विधायक बने थे, लेकिन वे छह साल तक पार्टी के साथ बने रहे। 2021 में कांग्रेस के टिकट पर चुने जाने के कुछ समय बाद ही वे बीजेपी में शामिल हो गए। बाद में उसी साल वे उसी सीट से बीजेपी के टिकट पर चुने गए।
बिस्वजीत दैमारी को कैबिनेट में मिली जगह
कैबिनेट में शामिल नए चेहरों में से एक बिस्वजीत दैमारी हैं। वह पिछली विधानसभा में स्पीकर थे। दैमारी बोडो समुदाय से बीजेपी के सबसे सीनियर नेता हैं। यह असम का सबसे बड़ा आदिवासी समूह है। राज्यसभा के पूर्व सांसद और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF) के लंबे समय तक सदस्य रहे दैमारी 2020 में बीजेपी में शामिल हुए थे। इससे पार्टी को बोडोलैंड इलाके में एक बड़ा चेहरा मिला।
रानोज पेगु हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में शिक्षा और मैदानी इलाकों की जनजातियों व पिछड़े वर्गों (गैर-BTC) के कल्याण मंत्री थे, उन्हें भी अब मंत्री बनाया गया है। मिसिंग ऑटोनॉमस काउंसिल के पूर्व चीफ एग्जीक्यूटिव मेंबर, पेगु मिसिंग समुदाय के एक प्रमुख नेता हैं। यह राज्य का एक और अहम आदिवासी समुदाय है। हालांकि, हिमंता की नई कैबिनेट में मध्य असम के बड़े पहाड़ी जिलों की कार्बी और दिमासा जनजातियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
दक्षिणी असम की बराक घाटी से दो मंत्री शामिल
इसमें दक्षिणी असम की बराक घाटी से दो मंत्री शामिल हैं। पहले तो कृष्णेंदु पॉल और दूसरे कौशिक राय। यह पिछली बीजेपी सरकार में भी मंत्री थे। धुबरी जिले के कोच राजबोंगशी समुदाय के नेता अश्विनी रॉय सरकार कैबिनेट में नए शामिल हुए हैं। कैबिनेट में एक और नया चेहरा रामेश्वर तेली हैं, जिन्होंने पिछले महीने शपथ ली थी। वे राज्य में बीजेपी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक और चाय-जनजाति समुदाय के नेता हैं। वे पहले केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री और बाद में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री रह चुके हैं।
हिमंता कैबिनेट में एक और नया चेहरा पहली बार विधायक बनीं नीलिमा देवी हैं। वह मंगलदाई सीट से चुनी गई हैं। असम प्रदेश बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष नीलिमा और अजंता नियोग कैबिनेट में एकमात्र महिला सदस्य हैं।
पिछली हिमंता कैबिनेट के अन्य प्रमुख चेहरे, उनमें वरिष्ठ असम गण परिषद (AGP) नेता केशव महंता शामिल हैं। वह कैबिनेट में अपनी पार्टी के सहयोगी अतुल बोरा के साथ शामिल हुए हैं। इनमें वरिष्ठ बीजेपी नेता और पिछली कैबिनेट के अहम सदस्य अशोक सिंघल भी शामिल हैं।
बीपीएफ के एकमात्र मंत्री चरण बोरो ने पिछले महीने सरमा के साथ शपथ ली थी। इस तरह, 17 सदस्यीय हिमंता कैबिनेट में बीजेपी के 13 मंत्री हैं, जबकि पार्टी की सहयोगी पार्टियों एजीपी और बीपीएफ के क्रमशः दो और एक मंत्री शामिल हैं।
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असम विधानसभा में ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जैसा पहले कभी नहीं दिखा। विधानसभा पहली बार इतना सांप्रदायिक दिख रही है, जितना कभी नहीं रही। विधानसभा की 126 सीटों में से एनडीए के पास 102 सीटें हैं, जिसमें बीजेपी की 82 और उसके सहयोगी AGP और BPF (बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट) की 10-10 सीटें शामिल हैं। एनडीए के विधायक जिन सभी सीटों पर जीते हैं, वे ऐसी हैं जहां एथनिक असमिया, हिंदू और ट्राइबल वोटर ज़्यादातर आबादी में हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
