असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रविवार को कहा कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों के बीच सीट साझा करने पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद प्रदेश नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों की सूची के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेगा।

सीएम हिमंता ने भाजपा मुख्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “हमारे गठबंधन में सहमति बन चुकी है। हम जानते हैं कि कौन कहां से चुनाव लड़ेगा; इस बारे में समझौता हो चुका है। गठबंधन बनाने में कोई दिक्कत नहीं है।” उन्होंने कहा, “सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद प्रदेश नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों की सूची के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेगा।”

एनडीए में सीट शेयरिंग

असम में एनडीए के घटक दलों में से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), असम गण परिषद (एजीपी), यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के मौजूदा विधानसभा में सदस्य हैं। राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति (आरएचजेएसएस) और जनशक्ति पार्टी (जेपी) भी राजग का हिस्सा हैं लेकिन राज्य विधानसभा में उनका कोई सदस्य नहीं है।

इससे पहले सीएम हिमंता ने 7 जनवरी को कहा था कि भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ सीट साझा करने के समझौते को 15 फरवरी तक अंतिम रूप दे सकती है। उन्होंने हालांकि, पिछले साल पांच दिसंबर को कहा था कि समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया 15 जनवरी तक पूरी होने की उम्मीद है।

असम विधानसभा के लिए मार्च-अप्रैल में होंगे चुनाव

असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मार्च-अप्रैल में चुनाव होने की संभावना है। यह 2023 में हुए परिसीमन के बाद राज्य में पहला विधानसभा चुनाव होगा। परिसीमन के बाद कई सीटों और उनकी भौगोलिक सीमाओं में बदलाव आया है जबकि कुछ अनारक्षित सीटें आरक्षित हो गईं और कुछ आरक्षित सीटें अनारक्षित हो गईं। इससे सत्ताधारी और विपक्षी गठबंधनों के भीतर जटिलताएं पैदा हो गई हैं।

असम विधानसभा में मौजूदा समय में भाजपा के 64, एजीपी के नौ, यूपीपीएल के सात और बीपीएफ के तीन सदस्य हैं। विपक्ष की बात करें तो राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 26, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के 15 और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का एक विधायक है। असम विधानसभा में एक निर्दलीय विधायक भी है।

कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भाजपा में शामिल

कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा रविवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए। इसके कुछ ही घंटों बाद, भाजपा ने बोरा को प्रदेश कार्यकारी समिति में शामिल किया। उनके साथ ही पूर्व कांग्रेस नेता संजू बोरा, राजेश कुमार जोशी, कंगन दास, गगन चंद्र बोरा और विपक्षी दल के कई अन्य कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हो गए।

बोरा ने 16 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था, जिसे पार्टी आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया था और वरिष्ठ नेता उनके आवास पर पहुंचे थे। राहुल गांधी ने भी उनसे बात की थी। बोरा ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए समय मांगा था लेकिन अगले दिन मुख्यमंत्री हिमंता उनके आवास पर गए और घोषणा की कि वह 22 फरवरी को भाजपा में शामिल हो जाएंगे।

कांग्रेस नेतृत्व ने मेरी भावनाओं को ठेस पहुंचाई- भूपेन बोरा

बोरा ने भाजपा में शामिल होने के बाद कहा, ”मैंने कांग्रेस से यह सोचकर इस्तीफा नहीं दिया था कि मैं भाजपा में शामिल हो जाऊंगा। मैंने यह सोचकर इस्तीफा दिया था कि कांग्रेस में हुई गलतियों के बारे में आत्मनिरीक्षण किया जाएगा और मुझे यह उम्मीद थी कि उन्हें सुधारने का वादा किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। बोरा ने आरोप लगाया, ”कांग्रेस ने असमिया समुदाय की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है। मैंने विचारधारा, अंतरात्मा और देशभक्ति के साथ 32 वर्षों तक कांग्रेस की सेवा की लेकिन अब मुझे दुख हुआ है।”

यह भी पढ़ें: बंगाल में बाबरी पर बढ़ा विवाद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बन रही निर्माणाधीन बाबरी मस्जिद को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता ही जा रहा है। अब इस मुद्दे पर विधानसभा में नेता विपक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ विधायक शुभेंदु अधिकारी ने हुमायूं कबीर पर बड़ा आरोप लगाते हुए एक सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि इस मस्जिद के निर्माण के लिए आधी धनराशि (50 प्रतिशत) बांग्लादेश से आई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

(भाषा के इनपुट के साथ)