ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के अध्यक्ष मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस पार्टी को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। उन्होंने असम के होजाई में साफ तौर पर कहा कि राज्य में कांग्रेस की राजनीतिक मौजूदगी अब लगभग खत्म हो चुकी है और पार्टी का जनाधार पूरी तरह कमजोर पड़ गया है। वह अब मुस्लिम लीग जैसी पार्टी बन गई है।

अजमल ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस अब न तो जनता के बीच प्रभावी है और न ही उसके पास कोई मजबूत संगठनात्मक आधार बचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि असम की राजनीति में कांग्रेस की भूमिका अब पहले जैसी नहीं रही और पार्टी धीरे-धीरे हाशिये पर चली गई है।

अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पर और भी तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी अब अपनी पुरानी राजनीतिक पहचान खो चुकी है और उसका स्वरूप बदल चुका है। उनके अनुसार, कांग्रेस अब एक ऐसी स्थिति में पहुंच गई है जहां वह मुस्लिम लीग जैसी राजनीति करने वाली पार्टी की तरह व्यवहार कर रही है।

‘दूसरों के लिए कुआं खोदने वाला खुद कुएं में गिर गया’

उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए यह भी कहा – “जो दूसरे के लिए कुआं खोदता है, उसमे वह खुद गिर जाता है। उन्होंने कहा कि एआईयूडीएफ को खत्म करने के लिए कांग्रेस ने कुआं खोदा, वह उसमें खुद गिर गई। कांग्रेस उसमें खत्म हो गई, इसका हमें दुख है। वह हार गया, बहुत-बहुत मुबारक हो।”

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जनता का भरोसा तेजी से बदल रहा है और लोग अब नए राजनीतिक विकल्पों की ओर देख रहे हैं। अजमल के मुताबिक, AIUDF असम के कई क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और जनता के मुद्दों को उठाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

असम की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच माना जाता है, जबकि AIUDF कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करती रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस गठबंधन ने महत्वपूर्ण सीटें हासिल की थीं, लेकिन सत्ता तक नहीं पहुंच सका था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी माहौल को और अधिक गरम करते हैं और विपक्षी दलों के बीच मतभेदों को उजागर करते हैं। असम की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में विकास, पहचान और सामाजिक समीकरण प्रमुख मुद्दे रहे हैं। अजमल के इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है, जहां सभी दल आगामी चुनावों के लिए अपनी रणनीतियों को मजबूत करने में लगे हुए हैं।

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दशकों तक बंगाल एक अपवाद था। यहां क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति के दम पर एक दौर में वाममोर्चा और बाद में तृणमूल कांग्रेस ने लंबे अरसे तक राज किया। अब बंगाल की राजनीति का नया स्वरूप सामने आया है। वर्ग और क्षेत्रीय अस्मिता की लीक छोड़कर बंगाल ने सत्ता विरोधी लहर में राष्ट्रवाद की राह पकड़ी है। मजबूत राजनीतिक ध्रुवीकरण सामने आया है। राजनीतिक लामबंदी के पुराने संकेतक – वर्गीय एका, भाषाई पहचान और क्षेत्रीय गौरव – एक तरह से विस्थापित हो गए हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति के आगे ममता बनर्जी की लड़ाकू छवि धराशायी हो गई। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक