ऐसे वक्त में जब भारत की ज्यादातर ऐतिहासिक इमारतें बेहद खस्ता हालत में हैं। ठीक इसी वक्त में उन इमारतों के रखरखाव का जिम्मा संभालने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने पिछले दो सालों में उन इमारतों से ज्यादा खर्च अपना आलीशान दफ्तर बनाने में खर्च किए है। ये खर्च 3,600 स्मारकों के संरक्षण पर साल भर में आने वाले कुल खर्च से भी ज्यादा है।

‘द प्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एएसआई ने साल 2016 से 305.3 करोड़ रुपये की रकम अपना मुख्यालय बनाने में खर्च की है। जबकि ये पता चला है कि साल 2017-18 में राष्ट्रीय महत्व के 3,686 संरक्षित स्मारकों की देखरेख में एएसआई ने कुल 206.55 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। एएसआई का कार्यालय हाल ही में दिल्ली के जनपथ से तिलक मार्ग में स्थानांतरित हो गया है।

एएसआई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एएसआई का पुराना भवन अब राष्ट्रीय संग्रहालय को दे दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने के अंत तक एएसआई के नए भवन का उद्घाटन कर सकते हैं। हालांकि अधिकारी ने कहा, ”ये तर्कसंगत नहीं है कि नए भवन पर खर्च रकम की तुलना पुराने भवन के रखरखाव पर आने वाले खर्च से की जाए। क्योंकि ये सिर्फ एक बार का ही निवेश है। अब से हम कार्यालय पर न्यूनतम खर्च करेंगे जबकि इसी रकम से स्मारकों के संरक्षण का काम जारी रहेगा।”

भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण विभाग पूरे देश में ऐतिहासिक महत्‍व की इमारतों और स्‍मारकों के संरक्षण का कार्य करता है। (फाइल फोटो)

इस पूरे मामले में जो सबसे बुरी बात है वह यही है कि इमारतों के संरक्षण पर होने वाले खर्च में लगातार गिरावट आ रही है। साल 2014—15 में आगरा सर्किल के तहत आने वाली इमारतों पर करीब 14 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इन इमारतों में ताजमहल, आगरा क़िला और फतेहपुर सीकरी के अलावा पांच अन्य केन्द्रीय संरक्षित स्मारक हैं। साल 2017-18 में ये खर्च घटकर सिर्फ 8.5 करोड़ रुपये रह गया। इसी साल, ताजमहल, आगरा फोर्ट और फतेहपुर सीकरी ने मिलकर 88.42 करोड़ रुपये का राजस्व इकट्ठा किया था। जबकि चेन्नई सर्किल पर साल 2014-15 में 10.70 करोड़ रुपये का खर्च किया गया था। साल 2017-18 में ये खर्च घटकर 4.6 करोड़ रुपये ही रह गया। वहीं हैदराबाद सर्किल में 9.98 करोड़ का खर्च अब घटकर सिर्फ 3.5 करोड़ ही रह गया है।