लाल किले को अक्सर लोग मुगलिया इतिहास से जोड़कर देखते हैं लेकिन लाल किला परिसर के भीतर ब्रिटिशकाल के दौरान भी कई निर्माण किए गए थे। अभी इन्हीं भवनों का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) करने में जुटा हुआ है। जोकि दो चरणों में बांटा गया है। गौरतलब है कि वर्ष 1857 के संग्राम के बाद जब अंग्रेजों ने अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर को कैद किया तो लाल किले को कब्जे में लेने के बाद उसका प्रयोग ब्रिटिश सैनिकों की छावनी के रूप में किया जाने लगा।
लाल किले के अंदर कई निर्माण कार्य ब्रिटिश शासन में कराए गए थे
इस दौरान कई निर्माण कार्य भी लाल किले के भीतर ब्रिटिश शासन के दौरान किए गए, जिन्हें ‘कालोनियल बिल्डिंग’, ‘टी-हाउस’ व ‘ब्रिटिश बैरक या सेल’ के नाम से जाना जाता है। एएसआइ, जहां कुछ वर्ष पहले ही अधिकतर कालोनियल भवनों का संरक्षण कार्य पूरा कर वहां संग्रहालय स्थापित कर चुकी है। वहीं किले की दीवारों से सटकर अंदर की ओर बनाए गए ‘ब्रिटिश बैरक’ का संरक्षण किया जा रहा है और अधिकतर क्षेत्र की मरम्मत की जा चुकी है।
ये वह बैरक हैं जहां, ब्रिटिश सेना के जवान रहा करते थे और आजादी के बाद भारतीय सेना के जवानों को इसे दे दिया गया था। करीब 56 साल बाद, वर्ष 2003 में लाल किले को भारतीय सेना ने पूरी तरह एएसआइ को हस्तांतरित कर दिया था। जिसके बाद लगातार लाल किला परिसर में संरक्षण का कार्य एएसआइ कर रही है। एएसआइ के अधिकारी ने बताया कि नार्दन सेल या मीना बाजार से लेकर सलीमगढ़ किले तक पहले चरण में और दिल्ली गेट से लेकर असद बुर्ज तक दूसरे चरण में ब्रिटिश बैरक के संरक्षण का काम किया जा रहा है।
ये ब्रिटिश काल के दौरान बनाए गए बैरक, भारतीय इतिहास का हिस्सा हैं इसीलिए इनका संरक्षण आवश्यक है। संरक्षण कार्य अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। डेढ़ करोड़ से अधिक बजट में हो रहा है संरक्षण कार्य एएसआइ दिल्ली सर्किल के उप-अधीक्षण पुरातत्व अभियंता मुनज्जर अली ने बताया कि मीना बाजार से लेकर सलीमगढ़ किले तक करीब सवा करोड़ रुपए की लागत से बैरकों का संरक्षण किया जा रहा है। जबकि दिल्ली गेट से लेकर असद बुर्ज तक करीब 50 लाख रुपए में संरक्षण कार्य किया जाएगा। इसके अलावा सुरक्षा के लिए हाल ही में लालकिला परिसर के प्रमुख क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए गए हैं।
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