रेल मंत्री बनने के बाद पहली बार अश्विनि वैष्णव से मिलने पहुंचे मां-बाप, समय कम मिला तो थमा दिया पत्र

एक दिन के दौर पर जोधपुर पहुंचे केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अपने माता पिता से ठीक से बात भी नहीं कर पाए। बातचीत के लिए कम समय होने की वजह से केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता दाउदलाल ने उन्हें अपने हाथ से लिखा हुआ एक पत्र ही सौंप दिया।

रेल मंत्री बंनने के बाद पहली बार जोधपुर पहुंचे अश्विनी वैष्णव ने अपने मां और पिता से भी मुलाक़ात की। (फोटो: ट्विटर/ AshwiniVaishnaw)

रेल मंत्री बनने के बाद अश्विनी वैष्णव शनिवार को पहली बार अपने पैतृक जिला जोधपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने मां और पिता से भी मुलाक़ात की। मुलाकात का समय कम होने की वजह से अश्विनी वैष्णव के पिता ने उन्हें अपने हाथ से लिखा हुआ पत्र ही थमा दिया। हालांकि बाद में मंत्री बेटे के आग्रह पर उनके पिता ने लिखा हुआ पत्र पढ़कर भी सुनाया।

शनिवार को केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव करीब 8 महीने बाद राजस्थान के जोधपुर स्थित अपने पैतृक आवास पर पहुंचे। कार से उतरने के साथ ही मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सबसे पहले अपनी मां के पैर छुए। लेकिन उनकी मां ने उन्हें गले से लगा लिया। अपने मंत्री बेटे को घर आया देख उनकी मां भावुक होने से खुद को नहीं रोक सकीं। मां को भावुक हुआ देख रेल मंत्री खुद भी भावुक हो गए। मां और बेटे को भावुक होता देख वहां मौजूद सभी लोग भी भावुक हो गए। 

एक दिन के दौरे पर जोधपुर पहुंचे केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अपने माता पिता से भी ठीक से बात नहीं कर पाए। बातचीत के लिए कम समय होने की वजह से केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के पिता दाउदलाल ने उन्हें अपने हाथ से लिखा हुआ एक पत्र सौंप दिया और उन्हें अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाने के लिए कहा। हालांकि बाद में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने पिता से लिखा हुआ पत्र पढ़कर सुनाने का भी आग्रह किया। पिता दाउदलाल भी अपने बेटे के आग्रह सबके सामने ही पत्र पढ़कर सुनाने लगे।

जोधपुर दौरे पर अश्विनी वैष्णव अपने कॉलेज एमबीएम विश्वविद्यालय भी पहुंचे। इस दौरान उन्हें विश्वविद्यालय की तरफ से सम्मानित भी किया गया। साथ ही अश्विनी वैष्णव ने कॉलेज के छात्रों को भी संबोधित भी किया। संबोधन के दौरान उन्होंने छात्रों से कहा कि मैंने भी छात्र जीवन में यहीं बैठकर राजनेता और पत्रकार अरुण शौरी का भाषण सुना था। साथ ही उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों की कहानी भी सुनाई। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जब वे 11वीं में थे तब पैसों की कमी की वजह से वे अपने जेबखर्च के लिए ट्यूशन पढ़ाया करते थे। उस समय उनके पास सिर्फ दो शर्ट ही हुआ करती थी।

इसके अलावा उन्होंने छात्रों को पुराने विद्यार्थी होने के नाते सफल होने के गुर भी सिखाए और छात्रों को हमेशा प्रयासरत रहने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने इस दौरान अपने बैच के दोस्तों के साथ मिलकर एक ग्रुप फोटो भी खिंचवाया और अपने पुराने दिनों को याद किया।  

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