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कांग्रेसी सीएम बोले- संजय गांधी जैसी भूमिका निभा रहा RSS, क्यों नहीं मच रही हाय-तौबा?, चुनावों में शिथिल रवैये पर पार्टी को भी लपेटा

राजस्थान के सीएम ने कहा कि "कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों को मोदी सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को उभारना चाहिए। लोग अर्थव्यवस्था के कुप्रबंध को लेकर गुस्से में हैं और यही समय है जब हमें सड़कों पर उतरना चाहिए।"

ashok gehlotराजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने आरएसएस पर साधा निशाना।

हालिया संपन्न हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में कांग्रेस पार्टी की तरफ से चुनाव प्रचार के दौरान आक्रामकता की कमी दिखी। अब इसे लेकर कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री ने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा है। बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी नेतृत्व द्वारा विधानसभा चुनावों में ‘जीत की कोशिश नहीं करने’ की आलोचना की है। एक कार्यक्रम में बोलते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि “पार्टी को अपनी पूरी ताकत और ऊर्जा के साथ चुनाव लड़ना चाहिए, ना कि हारी हुई मानसिकता के साथ।”

अशोक गहलोत ने “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर ‘संविधान से अतिरिक्त अथॉरिटी’ के तौर पर काम करने का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि “मंत्री और राज्यपाल की नियुक्ति संघ से अनुमति मिलने के बाद की जाती है लेकिन मीडिया आरएसएस की भूमिका पर चुप्पी साधे हुए है।” उन्होंने कहा कि “आपातकाल के दौरान कहा गया कि संजय गांधी संविधान अतिरिक्त अथॉरिटी के तौर पर काम कर रहे हैं। अब आरएसएस क्या कर रहा है? क्या मीडिया इस बारे में लिख रहा है? मुख्यमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति से पहले भी आरएसएस से चर्चा की जाती है। सभी मंत्रियों के साथ आरएसएस से जुड़े लोग बतौर ओएसडी तैनात किए गए हैं, लेकिन मीडिया इस पर चुप है!”

राजस्थान के सीएम ने कहा कि “कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों को मोदी सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को उभारना चाहिए। लोग अर्थव्यवस्था के कुप्रबंध को लेकर गुस्से में हैं और यही समय है जब हमें सड़कों पर उतरना चाहिए।” गहलोत ने कहा कि “जब एक बार आंदोलन शुरु होगा, तो जो लोग दबाव में काम कर रहे हैं…न्यायपालिका, आयकर विभाग, ईडी, सीबीआई…उनके रास्ते बदलेंगे। जब मूड बदलेगा, तो लोगों का मूड भी बदलेगा। नौकरशाह और एजेंसियां समझेंगी कि बदलाव हो सकता है। अभी देश सिर्फ एक ही दिशा में जा रहा है, न्यायपालिका से कभी उम्मीद नहीं की गई थी कि वह इस तरह से व्यवहार करेगी।”

अशोक गहलोत ने झारखंड विधानसभा चुनाव 5 चरणों में कराए जाने पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि “झारखंड चुनाव हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव के साथ क्यों नहीं कराए गए? साथ ही झारखंड जैसे छोटे राज्य में पांच चरणों में चुनाव कराए जाने के पीछे का तर्क क्या है? कोई भी चुनाव आयोग के इस फैसले पर सवाल नहीं उठा रहा है। सभी संस्थान बर्बाद किए जा रहे हैं, योजना आयोग को भी देख लें।”

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