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AIIMS के चिकित्सकों का दावा, आसाराम को सर्जरी की जरूरत नहीं

अमदाबाद। सुप्रीम कोर्ट को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों के दल ने सूचित किया है कि बलात्कार के आरोपी आसाराम को किसी सर्जरी की जरूरत नहीं है। केवल दवाओं से ही उनका इलाज हो सकता है। आसाराम को अगस्त 2013 में बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उधर, गुजरात हाई कोर्ट […]

अमदाबाद। सुप्रीम कोर्ट को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों के दल ने सूचित किया है कि बलात्कार के आरोपी आसाराम को किसी सर्जरी की जरूरत नहीं है। केवल दवाओं से ही उनका इलाज हो सकता है। आसाराम को अगस्त 2013 में बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उधर, गुजरात हाई कोर्ट ने आसाराम की बलात्कार के एक मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी।

न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर और आदर्श कुमार गोयल की खंडपीठ ने चिकित्सकों के दल की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा,‘एम्स के आधा दर्जन चिकित्सकों की राय में इस समय किसी प्रकार की सर्जरी की जरूरत नहीं है। उनका बहिरंग रोगी विभाग (ओपीडी) में ही उपचार हो सकता है। अब इसमें क्या बचा?’ आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने इस रिपोर्ट का अवलोकन करने के लिए कुछ समय मांगा। अदालत ने रिपोर्ट की प्रति आरोपी सहित सभी पक्षों को मुहैया कराने का निर्देश देते हुए इस मामले की सुनवाई 20 जनवरी को करने का निश्चय किया। अदालत ने आरोपी के वकील से कहा कि आसाराम का एम्स में परीक्षण कराने पर राजस्थान पुलिस की ओर से किए गए खर्च की गई राशि का भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।

इससे पहले मेडिकल आधार पर जमानत का अनुरोध करने वाले आसाराम को राजस्थान पुलिस विभिन्न परीक्षणों के लिए दिल्ली स्थित एम्स लेकर आई थी। मामले में सुनवाई की पिछली तारीख पर अदालत ने कहा था कि उन्हें जमानत पर रिहा करने का कोई ठोस मेडिकल आधार नहीं है। उनके साथ विशेष व्यवहार नहीं किया जा सकता। उसने 72 साल के आसाराम के मामले में कोई भी आदेश देने से इनकार करते हुए कहा था कि इलाज के लिए उन्हें यहां लाने के बारे में राज्य सरकार को ही निर्णय करना होगा। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 15 अक्तूबर को एम्स के निदेशक को आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा के लिए चिकित्सकों का दल गठित करने को कहा था।

जोधपुर में अपने आश्रम में नाबालिग लड़की का कथित यौन शोषण करने के मामले में आसाराम के खिलाफ बलात्कार, आपराधिक साजिश और अन्य आरोपों में जोधपुर की अदालत अभियोग निर्धारित कर चुकी है। जिला और सत्र अदालत ने बाल मजदूरी से संबंधित किशोर न्याय कानून की धारा 26 के अलावा आसाराम और उनके सहयोगी और मामले की सह आरोपी संचिता गुप्त उर्फ शिल्पी और शरद चंद्र के खिलाफ पुलिस की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को बरकरार रखा है।

उधर, अमदाबाद में गुजरात हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एजे देसाई ने सोमवार को जेल में बंद आसाराम की बलात्कार के एक मामले में जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला सूरत की एक महिला ने 2013 में दायर किया था। आसाराम ने जुलाई 2014 में इस आधार पर जमानत की मांग की थी कि गुजरात पुलिस पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। उनका कहना था कि यौन दुर्व्यवहार का यह मामला दुर्भावना से दाखिल किया गया है। आसाराम ने यह भी कहा था कि बलात्कार की शिकायत कथित अपराध के 12 साल बाद दाखिल की गई थी। जमानत याचिका में कहा गया है कि कथित अपराध 2001 में होने के बाद भी पीडित 2007 तक आसाराम के आश्रम में रही।

सूरत की दो बहनों ने आसाराम और उनके पुत्र नारायण साईं के खिलाफ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। उनके खिलाफ बलात्कार, अवैध रूप से बंधक बनाने और अन्य आरोप लगाए थे।

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