Owaisi on SIR Form-7: चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे वोटर लिस्ट के SIR के दौरान फर्जी फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जाने के आरोप लग रहे हैं। इसको लेकर लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर यह नाटक बंद नहीं हुआ तो प्रदर्शन दिल्ली से लेकर हैदराबाद, हर जगह होंगे।

ANI के मुताबिक, शनिवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “अगर फर्जी फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं, तो चुनाव आयोग को इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।” उन्होंने इस प्रक्रिया को मुसलमान समाज के लोगों के खिलाफ बताया है।

चुप नहीं बैठेंगे – ओवैसी

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “अगर फर्जी फॉर्म 7 भरे जा रहे हैं, तो हम चुनाव आयोग से अपील करते हैं कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे। अगर यह नाटक बंद नहीं हुआ, तो याद रखिए, हैदराबाद की सड़कों और गलियों में दिल्ली के जंतर-मंतर से भी बड़े विरोध प्रदर्शन होंगे, और इससे आपको बहुत परेशानी होगी। मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन चुप नहीं बैठेगी।”

फॉर्म 7 का क्यों होता है इस्तेमाल?

बता दें कि फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल करने पर आपत्ति उठाने के लिए किया जाता है, जिससे वो नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और संघ परिवार के लोग मुस्लिम मतदाताओं का नाम अंतिम मतदाता सूची से बाहर करने के लिए फॉर्म 7 का दुरुपयोग कर रहे हैं।

ओवैसी ने कहा, “फॉर्म 7 जमा किए जा रहे हैं, जिसमें उस व्यक्ति का नाम तो लिखा है जिसका नाम हटाया जाना है, लेकिन फॉर्म भरने वाले व्यक्ति का नाम और विवरण नहीं दिया जा रहा है। अगर ऐसा हो रहा है, तो यह पूरी तरह गलत है।” उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया।

‘इसकी इजाजत नहीं हो सकती’

ओवैसी ने कहा, “हम तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी सूचित कर रहे हैं कि इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।” इससे पहले, ओवैसी ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) एक “गुप्त एनआरसी” है और दावा किया था कि बीजेपी इस प्रक्रिया का उपयोग नागरिकता की परीक्षा में बदलने के लिए करेगी।

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ने शुरू से ही एसआईआर का विरोध किया था, यह आरोप लगाते हुए कि इस प्रक्रिया से समस्याएं पैदा होंगी और अंततः इसका उपयोग राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के आधार के रूप में किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हम शुरू से ही इसका विरोध कर रहे हैं। हमने एसआईआर का विरोध किया है। हमने चुनाव आयुक्त के चयन का विरोध किया है। अगर देश में किसी ने ऐसा किया है, तो वह हमने 2002 में किया था। हमने महाराष्ट्र, तेलंगाना , उत्तराखंड और दिल्ली में ऐसा किया था। किसी और ने ऐसा नहीं किया।

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मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनावों को लेकर तीन में से एक सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी बनाया था। उनके नामांकन में एक केस की जानकारी न देने के चलते चुनाव आयोग ने नामांकन रद्द कर दिया है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट चला गया है। इस मुद्दे पर अब हैदराबाद से लोकसभा सांसद और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया आई है। पढ़िए पूरी खबर…