असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लंबे समय से ‘मियां’ समुदाय को निशाना बना रहे हैं। उनके बयानों पर कई बार विवाद हो चुका है। हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में कहा कि जब तक वह सत्ता में हैं, मियां समुदाय के लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मियां समुदाय के लोगों को लगातार मुश्किलों का सामना करना चाहिए जिससे वे इस राज्य को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएं। अब इस पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार किया है।
एआईएमआईएम प्रमुख ने ‘मियां टिप्पणी’ पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की आलोचना की है और उन पर राज्य में मुस्लिम समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “असम के मुख्यमंत्री भाजपा के हैं। क्या कोई मुख्यमंत्री ऐसा कह सकता है। अगर ऑटो-रिक्शा में कोई मियां ड्राइवर है और बिल 5 रुपये है तो आप उसे 4 रुपये देंगे? असम में मियां उन मुसलमानों को कहते हैं जिन्हें 150-200 साल पहले अंग्रेजों द्वारा खेती और काम करने के लिए लाया गया था। वे भारत के नागरिक हैं। वे बंगाली बोलते हैं। असम के मुख्यमंत्री, आप कितने छोटे हैं ?”
ओवैसी के पीएम मोदी से सवाल
भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए ओवैसी ने आगे कहा कि सरकार एक विकसित भारत के निर्माण, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने और वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने की बात करती है लेकिन एक ऑटो रिक्शा चालक को 1 रुपया देने में हिचकिचाती है। उन्होंने कहा, “मैं भाजपा और भारत के प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूं, आप विकसित भारत की बात करते हैं। आप कहते हैं कि हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे। आप कहते हैं कि हम महाशक्ति बनेंगे। आपको चांद पर घर बनाना है लेकिन आप एक ऑटो के लिए एक रुपया भी नहीं देना चाहते।”
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एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि देश को विश्वास, ईमानदारी और आशा की आवश्यकता है लेकिन इसके बजाय उसे संदेह, झूठ और भय के माहौल के साथ छोड़ दिया गया है।
हिमंता सरमा के बयान पर विवाद
हिमंता सरमा ने मियां समुदाय को जानबूझकर परेशान करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था, “अगर वो रिक्शा के लिए 5 रुपये मांगें तो 4 रुपये ही दो। इस तरह के छोटे-छोटे काम से परेशानी होने पर ही वो राज्य छोड़ेंगे।” बाद में इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा था, “मैंने तो असल में उनके भले के लिए ही बात की थी। कानून के हिसाब से देखें तो वे यहां काम नहीं कर सकते। किसी देश के नागरिक अपनी ही जमीन पर काम कर सकते हैं। बांग्लादेश के लोग यहां कैसे काम कर सकते हैं? अगर वे मेरे अपने भले के लिए कही गई बात को स्वीकार नहीं कर सकते तो मुझे उनके खिलाफ ही काम करना होगा।”
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