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आसमान में प्याज के दाम! क्यों बढ़ रहे, सरकार क्या कर रही और कैसे काबू होंगी कीमतें? समझें

कृषि अफसरों का कहना है कि प्याज की शेल्फ लाइफ इस साल कम रही, क्योंकि किसानों ने यूरिया का जरूरत से अधिक इस्तेमाल कर लिया।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र Updated: October 24, 2020 11:14 AM
प्याज की बढ़ती कीमत के बीच सरकार ने इसके आयात के नियमों में ढील दे दी है।

बिहार चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने प्याज की भंडारण सीमा को स्टॉक लिमिट को दोबारा तय किया है। दरअसल, देश के कई हिस्सों में इस वक्त प्याज की कीमत 80 रुपए प्रति किलोग्राम के पार जा चुकी है। ऐसे में सरकार ने यह कदम प्याज के बढ़ते दामों को नियंत्रण मे लाने के लिए उठाया है। साथ ही बुधवार को केंद्र की तरफ से प्याज के आयात के नियमों में भी छूट दे दी गई।

बता दें कि महज एक महीने पहले ही संसद ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में बदलाव किया था और प्याज, आलू, दालों और कुछ अन्य खाद्य सामग्रियों को आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट से बाहर कर दिया था। यानी इन चीजों को भंडारण सीमा से बाहर कर दिया गया था। पर बिहार चुनाव के मद्देनजर प्याज के बढ़ते दामों की वजह से सरकार को एक बार फिर इन्हें नियंत्रित करने के लिए आगे आना पड़ा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्या वजहें जिससे प्याज के दामों में यह उतार-चढ़ाव लगातार जारी है।

आखिर क्यों बढ़ रहे प्याज के दाम?: देशभर में अगस्त के आखिरी हफ्ते से ही प्याज के दामों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पहले रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उत्तर कर्नाटक में भारी बारिश की वजह से खरीफ सीजन के प्याज की फसल को नुकसान हुआ है। यह फसल सितंबर में आनी थी और अक्टूबर के अंत में महाराष्ट्र से प्याज की फसल आने तक बाजार में रहने की संभावना थी।

हालांकि, सितंबर में हुई भारी बारिश से कर्नाटक में नई फसल का बड़ा नुकसान हुआ। इसका असर मध्य प्रदेश और गुजरात में स्टोरेज में रखे गए प्याजों पर भी पड़ा। सिर्फ महाराष्ट्र के किसानों के पास ही बाजार में बेजे जाने लायक प्याज बचे थे, जिन्होंने गर्मियों की शुरुआत में ही 28 लाख टन प्याज भंडार में रख लिए थे। हालांकि, महाराष्ट्र के किसानों को भी भंडारण के दौरान 50-60 फीसदी प्याज की पैदावार का नुकसान उठाना पड़ा। अहमदनगर, नासिक और पुणे में बारिश की वजह से प्याज का काफी नुकसान हुआ।

दूसरी तरफ कृषि अफसरों का कहना है कि प्याज की शेल्फ लाइफ इस साल कम रही, क्योंकि किसानों ने यूरिया का जरूरत से अधिक इस्तेमाल कर लिया। पिछले साल प्याज के दाम अच्छे थे और किसान यूरिया के जरिए इनकी पैदावार बढ़ाना चाहते थे। पर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से इनकी अचल आयु घट गई।

महाराष्ट्र में भंडारण में रखे गए 28 लाख टन प्याज में महज 10-11 लाख टन प्याज ही अब ठीक बचे हैं। भारत में हर साल प्याज की खपत 160 लाख टन के करीब है। अकेले महाराष्ट्र में ही हर दिन 4 से 6 हजार टन प्याज का इस्तेमाल होता है।

क्या आयात से होगा कोई फायदा?: ईरान से आयात होने वाला प्याज मुंबई बंदरगाह पर 35 रुपए प्रति किलो की कीमत तक पहुंच जाता है। अगर इसमें परिवहन और हैंडलिंग की कीमतें जोड़ दी जाएं, तो प्याज की कीमत करीब 40-45 रुपए प्रति किलो हो जाती हैं। हालांकि, व्यपारियों का कहना है कि इस तरह के प्याज सिर्फ होटल और हॉस्पिटैलिटी उद्योग से जुड़े लोग ही मंगाते हैं न कि खुदरा व्यापारी। ऐसे प्याज में देशी की खुश्बू नहीं होती और यह भारतीय प्याज से बड़े आकार के होते हैं।

केंद्र सरकार ने उम्मीद जताई है कि खरीफ फसल के प्याज बाजार में आने से इसकी कीमतें कम होंगी। हालांकि, बारिश की वजह से हुए फसल के नुकसान से महाराष्ट्र के आने वाले प्याज अब नवंबर के शुरुआती हफ्तों की जगह नवंबर के अंत तक ही आ पाएंगे। यानी प्याज के दाम कम होने में काफी समय लग सकता है।

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