ताज़ा खबर
 

हिंद महासागर में चीन की चुनौती से निपटने के लिए भारत-जापान ने मिलाया हाथ

भारत की ओर जापानी विदेश मंत्रालय को दक्षिण अंडमान द्वीप में 15 मेगावाट डीजल पावर प्लांट के प्रोजेक्ट का प्रस्‍ताव भेज दिया गया है, जिस पर जल्‍द काम शुरू हो सकता है।

Author नई दिल्‍ली | March 13, 2016 09:26 am
चीन काफी समय से अंडमान निकोबार में घुसपैठ की कोशिशें कर रहा है। भारतीय नौसेना कई बार इस क्षेत्र में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बढ़ाने की मांग सरकार से कर चुकी है।

हिंद महासागर में चीन की चुनौती से निपटने के लिए भारत और जापान साथ आ रहे हैं। इसी रणनीति के तहत अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में ढांचागत विकास को लेकर भारत और जापान के बीच बातचीत शुरू हो चुकी है। जापानी विदेश मंत्रालय को दक्षिण अंडमान द्वीप में 15 मेगावाट डीजल पावर प्लांट के प्रोजेक्ट का प्रस्‍ताव भेज दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जल्‍द ही काम शुरू हो सकता है। मलक्का का पश्चिमोत्तर हिस्सा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह हैं, जहां से चीन के समुद्री विस्तार पर बड़ी हद तक नियंत्रण लगाया जा सकता है।

समुद्र में इसे लेकर चीन सबसे ज्यादा संवेदनशील रहा है। चीन के लिए यह इलाका काफी महत्व का है, क्योंकि वह यहां अपनी नौसेना का विस्तार करना चाहता है। दरअसल, यह इलाका मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच दक्षिण अफ्रीका व मध्य-पूर्व से ईंधन लाने ले जाने में चीन के सामरिक महत्व का मार्ग है। हालांकि चीन के ‘वन बेल्ट, वन रोज’ प्रोजेक्ट की अपेक्षा इस इलाके में फिलहाल जापान की सहायता ने कम ध्यान आकर्षित किया है।

‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना का लक्ष्य चीन को सड़क, रेलवे और बंदरगाह के नेटवर्क से पूरे एशिया और यूरोप से जोड़ने की कोशिश है। लेकिन टोक्यो ने कहा है कि इस द्वीप पर प्रस्तावित पावर प्लांट के लिए जापान का सहयोग काफी आगे की सोच है और वह फिलहाल छोटे प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेगा। जापान का इरादा धीरे धीरे बड़ी योजनाओं पर काम शुरू करने का है।

Read Also: South China Sea: चीन ने और कड़े किए तेवर, विवादित द्वीपों से शुरू करेगा विमान सेवा, अमेरिका ने किया विरोध

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App