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आर्थिक मंदी के बीच मनरेगा के तहत जॉब मांगने का आंकड़ा नौ साल में सबसे ज्यादा, कोरोना के बाद गांव को लौटे मजदूर तोड़ सकते हैं ये रिकॉर्ड!

आंकड़ों के मुताबिक व्यक्तिगत तौर पर 2019-20 में अधिक लोगों ने इस योजना के तहत काम किया। जिसमें 7.86 करोड़ लोग देशभर के विभिन्न स्थलों पर कार्यरत थे। 2012-13 के बाद से ये सबसे अधिक है, जब 7.97 करोड़ लोगों ने इस योजना के तहत काम किया।

Author Translated By Ikram नई दिल्ली | Updated: April 3, 2020 9:07 AM
लॉकडाउन के दौरान काम करने वाला मजदूर। (Express photo by Shashi Ghosh)

देश में जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी होती जा रही है वैसे-वैसे मनरेगा के तहत रोगजार की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में मनरेगा के तहत रोजगार की मांग रिकॉर्ड 9 साल ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। MGNREGA के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किए गए आंकड़ों के मुताबिक 5.47 करोड़ परिवारों ने मनरेगा के तहत काम देने की मांग की। ये 2010-11 के बाद सबसे अधिक है। तब 5.5 करोड़ परिवार ने रोजगार की मांग की। 2018-19 में ये आंकड़ा 5.27 करोड़ था।

आंकड़ों के मुताबिक व्यक्तिगत तौर पर 2019-20 में अधिक लोगों ने इस योजना के तहत काम किया। जिसमें 7.86 करोड़ लोग देशभर के विभिन्न स्थलों पर कार्यरत थे। 2012-13 के बाद से ये सबसे अधिक है, जब 7.97 करोड़ लोगों ने इस योजना के तहत काम किया। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना साल 2006 में देशभर में 200 जिलों से शुरू की गई थी।

अन्य आंकड़ों से पता चलता है कि किसी भी मनरेगा के तहत खर्च को दर्ज नहीं करने वाली ग्राम पंचायतों की संख्या में भी गिरावट आई है। पिछले वित्त वर्ष में यह संख्या 9,144 थी जो 2018-19 के आंकड़े 10,978 से कम थी। देश में ऐसी ग्राम पंचायतों की संख्या 2017-18 में 11,789, 2016-17 में 19,451, 2015-16 में 39,469 और 2014-15 में 39,531 थी।

आंकड़ों से पता चलता है कि 2019-20 में 263.73 करोड़ व्यक्ति दिन रोजगार पैदा हुए। ये 2018-19 के 267.96 करोड़ से थोड़ा कम है। हालांकि 2012-13 से 2017-18 तक कुल व्यक्ति दिन रोजगार से काफी ज्यादा है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय में एक सूत्र ने बताया, ‘इसकी संभावना है कि इस बार रोजगार के आंकड़े पिछले साल के आंकड़े से ज्यादा होंगे।’ बता दें कि ऐसा देशभर में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन की स्थिति से हुआ। सूत्र ने आगे बताया कि 2019-20 के दौरान, केंद्र ने MGNREGA के लिए 72,162.13 करोड़ रुपये जारी किए, जो अब तक की सबसे अधिक राशि है, और 2018-19 में जारी किए गए 62,125.07 करोड़ रुपये से काफी अधिक है।

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