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स्मृतिशेष: सामाजिक सरोकारों के लिए याद आएंगे स्वामी अग्निवेश

सामाजिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणियों के लिए मशहूर स्वामी अग्निवेश 1977 में हरियाणा विधानसभा में विधायक चुने गए और हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे। 1981 में उन्होंने बंधुआ मुक्ति मोर्चा नाम के संगठन की स्थापना की। 1970 में आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई थी।

कुछ दिन पहले शरीर के कई अंग फेल होने के बाद स्वामी अग्निवेश को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। (फाइल / एक्सप्रेस फोटो कमलेश्वर सिंह)

सामाजिक कार्यकर्ता और आर्य समाज की प्रतिष्ठित हस्ती स्वामी अग्निवेश का शुक्रवार को दिल्ली में निधन हो गया। स्वामी अग्निवेश को सोमवार को नई दिल्ली के यकृत व पित्त विज्ञान संस्थान (आइएलबीएस) में भर्ती कराया गया था। लंबे समय से लिवर सिरोसिस से पीड़ित चल रहे थे।

आइएलबीएस ने स्वामी अग्निवेश के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, ‘वह लिवर सिरोसिस से पीड़ित थे और आज उनकी हालत बिगड़ गई। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया व हृदयाघात से शाम साढ़े छह बजे उनका निधन हो गया।’ वे 81 साल के थे।

सामाजिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणियों के लिए मशहूर स्वामी अग्निवेश 1977 में हरियाणा विधानसभा में विधायक चुने गए और हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे। 1981 में उन्होंने बंधुआ मुक्ति मोर्चा नाम के संगठन की स्थापना की। 1970 में आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई थी।

स्वामी अग्निवेश ने 2011 में अण्णा हजारे की अगुआई वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में भी हिस्सा लिया था। हालांकि, बाद में मतभेदों के चलते वह इस आंदोलन से दूर हो गए थे। स्वामी अग्निवेश ने रियलिटी शो बिग बॉस में भी हिस्सा लिया था।

विवादों से नाता : स्वामी अग्निवेश की शख्सियत का प्रभाव यूं तो अध्यात्म से लेकर राजनीति और सामाजिक कार्यों तक था, लेकिन उन्होंने सुर्खियां अपने विवादित बयानों को लेकर बटोरीं। बाबा बर्फानी को लेकर दिए उनके बयान पर तो देश भर में बवाल हुए और जगह-जगह उनके पुतले जलाए गए।

साल 2011 की गर्मियों में अग्निवेश ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से हर साल बनने वाला शिवलिंग महज एक बर्फ का पुतला है। हजारों फीट ऊंचे पहाड़ पर प्राकृतिक तरीके से एक जगह बर्फ जम जाती है, जिसे हिंदू साधु-संत भगवान बताते हैं और अपनी दुकानदारी चमकाते हैं। उनके इस बयान पर बहुत बवाल हुआ। देशभर में उनके पुतले जलाए गए। देश के कई हिस्सों में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

सोशल मीडिया पर लोगों ने स्वामी अग्निवेश के साथ दो साल पहले झारखंड में हुई मारपीट का वीडियो जारी कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि वे साहसी व्यक्ति थे और आमजन के हित में बड़े से बड़ा खतरा उठाते थे। उन पर हमला अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला था।

अग्निवेश 17 जुलाई, 2018 को झारखंड के पाकुड़ में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले थे। इससे पहले उनके होटल के बाहर ही कुछ लोगों ने उनकी पिटाई कर दी, उनके कपड़े तक फाड़ दिए। दरअसल, कुछ समय पहले सनातन धर्म को लेकर दिए गए उनके बयान से कुछ संगठन नाराज थे और इसकी प्रतिक्रिया में उनपर हमला हुआ था।

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