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केजरीवाल कैबिनेट का जातीय गणित: चार सवर्ण, एक-एक OBC, SC और मुस्लिम, पर आठ महिलाओं में से एक को भी नहीं बनाया मंत्री

आम आदमी पार्टी के टिकट पर 8 महिला नेता विधायक चुनी गई हैं। जिनमें आतिशी, राखी बिड़ला, राज कुमारी ढिल्लन, प्रीति तोमर, धनवंती चंदेला, प्रमिला टोकस, भावना गौड़ और बंदना कुमारी का नाम शामिल है।

arvind kejriwal cabinetरामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में केजरीवाल कैबिनेट ने शपथ ग्रहण की। (पीटीआई फोटो)

आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने रविवार को तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। केजरीवाल के साथ उनकी कैबिनेट के 6 मंत्रियों ने भी शपथ ली। कैबिनेट में जिन नेताओं को जगह दी गई है, उनमें मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, कैलाश गहलोत, गोपाल राय, इमरान हुसैन और राजेंद्र पाल गौतम का नाम शामिल है। हालांकि कैबिनेट में शामिल होने वाले सभी नेता केजरीवाल सरकार के पिछले कार्यकाल में भी मंत्री पद संभाल चुके हैं। देश के अन्य राज्यों की सरकारों की तरह दिल्ली सरकार में भी मंत्री पद के जरिए जातीय  और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की गई है।

बता दें कि दिल्ली कैबिनेट में चार सवर्ण, एक-एक ओबीसी और एससी और एक मुस्लिम नेता को जगह दी गई है। जिनमें खुद सीएम केजरीवाल और सत्येंद्र जैन वैश्य समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं मनीष सिसोदिया राजपूत और गोपाल राय भूमिहार वर्ग से आते हैं। कैलाश गहलोत अन्य पिछड़ा वर्ग के जाट समुदाय से आते हैं। वहीं राजेंद्र पाल गौतम दलित समुदाय से आते हैं। इमरान हुसैन दिल्ली सरकार में एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं।

देश की अन्य जगहों की तरह दिल्ली में भी व्यापार के क्षेत्र में वैश्य समाज का खासा दबदबा है। ऐसे में माना जा रहा है कि वैश्य समाज को साधने के लिए केजरीवाल सरकार ने सत्येंद्र जैन को कैबिनेट में जगह दी है। सिसोदिया, अन्ना हजारे के आंदोलन के समय से ही केजरीवाल के साथ रहे हैं और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। इसके अलावा पिछली सरकार में शिक्षा के क्षेत्र में जो अच्छा काम हुआ, उसके चलते भी सिसोदिया की फिर से कैबिनेट में वापसी हुई है।

सिसोदिया के आने से जातीय वोटबैंक को भी साधने का प्रयास किया गया है। दिल्ली के ग्रामीण खासकर हरियाणा से मिलते इलाकों में जाट मतदाताओं की भारी तादाद है। ऐसे में कैलाश गहलोत को कैबिनेट में शामिल करने की यह बड़ी वजह मानी जा रही है।

गोपाल राय भी आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। इसके अलावा दिल्ली में पूर्वांचल के मतदाताओं की काफी संख्या है, जिनमें भूमिहार वर्ग के लोगों की संख्या ठीक-ठाक है। ऐसे में गोपाल राय को एक बार फिर कैबिनेट में जगह देकर इन मतदाताओं को अपने पाले में करने की कोशिश की गई है।

दिल्ली में दलित वर्ग के मतदाताओं की भी अच्छी खासी संख्या है। खासकर उत्तर पूर्वी लोकसभा क्षेत्र, जिनमें सीमापुरी और गोकुलपुरी विधानसभा सीटें आती हैं, वहां दलित वर्ग के मतदाता काफी प्रभावशाली हैं। ऐसे में राजेंद्र पाल गौतम को कैबिनेट में जगह देकर दलित मतदाताओं को भी लुभाने का प्रयास किया गया है। राजेंद्र गौतम सीमापुरी विधानसभा से विधायक चुने गए हैं।

इमरान हुसैन दिल्ली सरकार में एकमात्र मुस्लिम चेहरा हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था। इसका पार्टी को खासा लाभ भी हुआ। ऐसे में इमरान हुसैन को कैबिनेट में जगह देकर केजरीवाल सरकार ने अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने का प्रयास किया है।

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के टिकट पर 8 महिला नेता विधायक चुनी गई हैं। जिनमें आतिशी, राखी बिड़ला, राज कुमारी ढिल्लन, प्रीति तोमर, धनवंती चंदेला, प्रमिला टोकस, भावना गौड़ और बंदना कुमारी का नाम शामिल है। हालांकि फिलहाल किसी भी महिला विधायक को कैबिनेट में जगह नहीं दी गई है।

यह बात इसलिए भी चौंकाती है क्योंकि इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी को महिलाओं का काफी समर्थन मिला था। एक सर्वे के अनुसार, दिल्ली के पुरुष मतदाताओं की तुलना में ज्यादा महिला मतदाताओं ने आप पार्टी को वोट दिया था। जिसके चलते आम आदमी पार्टी को दिल्ली में प्रचंड जीत मिली थी। माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार में किसी महिला नेता को जगह मिल सकती है।

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