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केजरीवाल का ऑडियो टैप: क्या सच में मुसलमानों को टिकट नहीं देना चाहती थी आप

दिल्ली में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के बारे में कथित तौर पर अरविंद केजरीवाल के चर्चा करने का टैप आने के एक दिन बाद गुरुवार को एक अन्य टैप सामने आया जिसमें वे कथित तौर पर बात कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की लहर को रोकने के लिए मुसलमानों के […]

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केजरीवाल का नया टेप, मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं देना चाहते थे AAP संयोजक! (फोटो: भाषा)

दिल्ली में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस विधायकों को तोड़ने के बारे में कथित तौर पर अरविंद केजरीवाल के चर्चा करने का टैप आने के एक दिन बाद गुरुवार को एक अन्य टैप सामने आया जिसमें वे कथित तौर पर बात कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की लहर को रोकने के लिए मुसलमानों के पास आप के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

दूसरी ओर आप नेता संजय सिंह पर कांग्रेस के पूर्व विधायक ने आरोप लगाया है कि सिंह ने समर्थन के बदले मंत्री पद की पेशकश की थी। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले की गई आॅडियो रिकॉर्डिंग में केजरीवाल को कहते सुना जा रहा है कि मुसलमान ‘आप’ से यह अपेक्षा नहीं कर सकते हैं कि वह उनके समुदाय के कई उम्मीदवारों को उतारेगी लेकिन वे चाहते हैं कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराए।

टैप में केजरीवाल को कहते सुना जा रहा है-अगर आप सोचते हैं कि हम 11 मुसलिम उम्मीदवारों को उतारेंगे तो इसे भूल जाइए। सवाल यह नहीं है कि आप मुसलिम समुदाय से लोगों को 11 सीटें देने जा रही है। मुसलमान हमारी ओर इस तरह से देख रहे हैं कि अगर कोई मोदी रथ को रोक सकता है तो वह सिर्फ आम आदमी पार्टी है। मुसलमानों को हमसे सिर्फ यही उम्मीद है। उन्हें इस बात की कोई उम्मीद नहीं है कि अधिक मुसलिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाएगा। 2000, 3000 और 5000 लोगों का सर्वेक्षण कर लें। मुसलमानों का एक सर्वेक्षण कर लें। क्या प्राथमिकता है।


उन्होंने कहा-आज, देश में कोई भी मोदी रथ को रोकने में सक्षम नहीं है। वे एक के बाद एक राज्यों में सरकार बना रहे हैं। आज मुसलमान हमारी तरफ देख रहे हैं। अगर कोई मोदी रथ रोक सकता है। कांग्रेस समाप्त हो गई है। उसने छोड़ दिया है। वह चुनाव नहीं लड़ रही है। वे हमें 11 सीटों पर उतारने को कह रहे हैं। माना जा रहा है कि यह टैप आप के किसी असंतुष्ट नेता ने जारी किया है। बुधवार को सामने आए टैप में केजरीवाल कथित तौर पर दिल्ली में पिछले साल सरकार गठन करने के लिए कांग्रेस के छह विधायकों को तोड़ने की बात कहते सुनाई पड़ रहे थे। दूसरी ओर गुरुवार को कांग्रेस के एक पूर्व विधायक ने आरोप लगाया है कि आप के एक वरिष्ठ नेता ने समर्थन के बदले उन्हें मंत्री पद की पेशकश की। ओखला से कांग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद खान ने दावा किया है कि उनकी उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के साथ एक बार और आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह के साथ पिछले साल दो बार बैठक हुई । यह भी पढ़ें: क्या अभी और भड़केगी ‘आप की आग’खान के दावों को खारिज करते हुए सिंह ने उन्हें साक्ष्य मुहैया कराने की चुनौती दी। खान ने कहा, ‘सिंह कहते हैं कि वे खरीद-फरोख्त में शामिल नहीं थे। मेरी एक मुलाकात मनीष सिसोदिया जी और दो बार संजय सिंह से नोएडा में हुई। उन्होंने समर्थन के बदले मुझे कभी भी धन की पेशकश नहीं की बल्कि मंत्री पद और पांच विधायकों को विभिन्न बोर्ड के अध्यक्ष पद की पेशकश की’। ओखला के पूर्व विधायक ने कहा कि उन्होंने अपने और सिंह के बीच वार्ता को रिकार्ड कर लिया है और बातचीत को सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा-मैं साक्ष्य को निश्चित रूप से सार्वजनिक करूंगा। मैं पीछे हटने को तैयार नहीं हूं। अब संजय सिंह ने भी स्वीकार किया है कि उन्होंने मुझसे मुलाकात की। खान ने कहा कि सिंह ने उन्हें निर्देश दिया था कि जब तक कुछ ठोस सामने नहीं आए तब तक वे दोनों के बीच बातचीत को सार्वजनिक नहीं करें। खान ने कहा, ‘ सिंह ने कहा कि अगर आप पार्टी छोड़ रहे हैं...हमें मालूम है कि चुनाव लड़ना काफी खर्चीला है। उस मुद्दे पर भी हम सोचेंगे’। खान ने कहा-उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत को कमरे के बाहर नहीं जाना चाहिए क्योंकि आप के कुछ वरिष्ठ नेता नहीं चाहते कि हम कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाएं। इसलिए जब तक इस पर ठोस काम नहीं होता मामले को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। सिंह ने स्वीकार किया कि पिछले साल उन्होंने सरकार बनाने के लिए खान से मुलाकात की। लेकिन इन बातों से इनकार किया कि उन्होंने पार्टी को समर्थन के बदले किसी मंत्री पद की पेशकश की थी। खान का दावा अहम है क्योंकि आप ने बुधवार को दावा किया था कि वह न तो किसी तरह के खरीद-फरोख्त, न ही जोड़तोड़ में शामिल थी। आप नेता आशीष खेतान ने बुधवार को कहा था, ‘खरीद-फरोख्त शब्द का इस्तेमाल करना कठिन और गैर जिम्मेदाराना है। हमने न तो उन्हें धन का लालच दिया न ही उन्हें किसी लाभ की पेशकश की। इस देश में राजनीतिक पालाबदल कोई नई बात नहीं है।    

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