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अरविंद केजरीवाल: पसंद हैं गोविंदा की कॉमेडी फिल्में, सिसोदिया संग देखते हैं मूवी, बचपन में चला चुके किराना दुकान

भारतीय राजस्व सेवा की प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी छोड़कर एनजीओ के रास्ते भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़कर राजनीति में आने वाले अरविंद केजरीवाल का संबंध बहुत ही साधारण परिवार से रहा है।

Author Edited By प्रमोद प्रवीण नई दिल्ली | Published on: February 15, 2020 3:04 PM
सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया। फोटो: Indian Express

दिल्ली की सत्ता पर तीसरी बार लगातार काबिज होने वाले अरविंद केजरीवाल इन दिनों सिसासत के स्टार बने हुए हैं। शीला दीक्षित के बाद वो पहले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने दिल्ली में जीत की हैट्रिक लगाई है। भारतीय राजस्व सेवा की प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी छोड़कर एनजीओ के रास्ते भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़कर राजनीति में आने वाले अरविंद केजरीवाल का संबंध बहुत ही साधारण परिवार से रहा है। वो मूल रूप से हरियाणा के भिवानी जिले के सिवानी के रहने वाले हैं। इनका सिवानी में ही जन्म हुआ और वहीं प्राथमिक शिक्षा पाई।

केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को जन्माष्टमी के दिन हुआ था। इस वजह से घरवाले और गांव वाले उन्हें किशन कहकर पुकारते हैं। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक केजरावील बचपन में अपने चाचा की किराने की दुकान में भी हाथ बंटाया करते थे। उनकी यह दुकान सिवानी में ही बस स्टैंड पर हुआ करती थी। अरविंद केजरीवाल बचपन से ही मेधावी थे। वो अक्सर बहाना बनाकर किताबें पढ़ा करते थे।

केजरीवाल ने राजनीति के दांव पेंच और सत्ता से टकराव मोल लेने का गुर अपने पूर्वजों से ही सीखा था। उनके दादा मंगल चंद ने 1968 से 1977 तक हरियाणा में एकछत्र राज करने वाले बंसीलाल के खिलाफ बिगुल फूंका था और जनता पार्टी उम्मीदवार का चुनाव में समर्थन किया था। इस चुनाव में कांग्रेस की तरफ से बंसीलाल की हार हुई थी जबकि जनता पार्टी उम्मीदवार चंद्रावती की रिकॉर्ड मतों से जीत हुई थी।

चाइनीज खानों के शौकीन अरविंद केजरीवाल के बारे में कम ही लोगों को मालूम है कि उन्हें कॉमेडी फिल्में पसंद हैं। खासकर अभिनेता गोविंदा की फिल्में उन्हें खूब भाती हैं। वो अक्सर मनीष सिसोदिया के साथ कॉमेडी फिल्में देखने जाया करते थे। मनीष सिसोदिया उनके करीबी हैं और उनकी सरकार में उप मुख्यमंत्री हैं।

2006 से पहले केजरीवाल को ज्यादा प्रसिद्धि नहीं मिली थी। वह तब लोगों की नजरों में आए जब 2006 में ही उन्हें राइट टू इन्फॉर्मेशन (आरटीआई) पर जागरूकता के लिए मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया। वहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से जुड़ने से पहले वह ‘परिवर्तन’ नाम का एनजीओ भी चला चुके हैं। वह ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ कैंपेन के मुख्य चेहेरों में शामिल थे।

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