आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोगों पर जबरदस्ती E20 पेट्रोल थोप रही है। उन्होंने दावा किया कि इससे वाहनों को काफी नुकसान हो रहा है।
एक्स पर एक वीडियो पोस्ट साझा करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “20% एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर जनता में काफी नाराजगी है।”
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 30 जून को केंद्र सरकार ने अटॉर्नी जनरल के जरिए सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि यह सिर्फ़ एक प्रयोग है और आगे की कार्रवाई नतीजों पर निर्भर करेगी। लेकिन, जब यह मामला मीडिया और प्रेस में आया, तो केंद्र सरकार पूरी तरह से पीछे हट गई। उन्होंने एक बयान जारी कर दावा किया कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा था और इन खबरों को गलत बताया।
AAP चीफ ने आगे सवाल किया कि प्रयोग का मतलब आम तौर पर किसी चीज़ को सीमित स्तर पर आज़माना होता है, जैसे 100, 500 या 1,000 गाड़ियों पर। ऐसे ट्रायल के नतीजों के आधार पर यह तय किया जाता है कि इसे पूरे देश में लागू किया जाए या नहीं। फिर भी, आपने पूरे देश में सारी गाड़ियों के लिए एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल अनिवार्य कर दिया है, जिससे 1.4 अरब लोगों की आबादी प्रभावित हो रही है, और साथ ही आप यह भी दावा कर रहे हैं कि आप एक प्रयोग कर रहे हैं।”
केजरीवाल ने सरकार से सवाल किया कि क्या आप उन लोगों को मुआवज़ा देंगे जिनकी गाड़ियां खराब हो रही हैं? लोगों के जनादेश का सम्मान करना, उनकी चिंताओं को सुनना और उनकी इच्छाओं के अनुसार काम करना आपकी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मैं आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे इस नीति को वापस लेने का आग्रह करूंगा।
आम आदमी पार्टी के नेता की ये टिप्पणी E20 पेट्रोल के वाहनों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताओं के बीच आई है। इससे पहले, बुधवार को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे भी एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने पर्याप्त सबूत, सार्वजनिक परामर्श या सहमति के बिना एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बाजार में उतारकर “3.6 करोड़ भारतीयों को एक प्रयोग का हिस्सा” बना दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत दलीलों का हवाला देते हुए खड़गे ने दावा किया कि सरकार ने स्वीकार किया है कि एथनॉल मिश्रित के प्रभाव का अभी भी आकलन किया जा रहा है, जबकि उन्होंने सरकार पर पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श या सहमति के बिना नीति को लागू करने का आरोप लगाया।
इस बीच, पिछले सप्ताह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दोहराया कि एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम वैज्ञानिक रूप से मान्य है और सरकार द्वारा लगातार निगरानी की जाती है। कच्चे तेल के आयात को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्यों के साथ एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम 2003 में शुरू किया गया था। तकनीकी तैयारियों और हितधारकों के परामर्श के आधार पर इस कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है, जिसका अंतिम चरण 2023 से 20 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग (E20) का कार्यान्वयन है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जिसमें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एथनॉल सप्लाई का कोटा बढ़ाने के लिए कहा गया था। पढ़ें पूरी खबर।
