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केजरीवाल vs जंग: प्रख्यात वकील राजीव धवन, इंदिरा जयसिंह ने लिया ‘आप’ सरकार का पक्ष

मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर उप राज्यपाल के अधिकारों के मुद्दे पर दिल्ली सरकार द्वारा राय मांगने पर प्रख्यात वकीलों राजीव धवन और इंदिरा जयसिंह ने उसके रूख का पक्ष लेते हुए कहा कि उप राज्यपाल के पास इस मामले में कोई स्वतंत्र विवेकाधिकार नहीं है।

Author May 19, 2015 3:40 PM
दिल्ली सरकार ने मीना को सूचित किया कि वह एसीबी से नहीं जुड़ सकते क्योंकि इस जांच एजेंसी में अनुमोदित संयुक्त आयुक्त का पद नहीं है

मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर उप राज्यपाल के अधिकारों के मुद्दे पर दिल्ली सरकार द्वारा राय मांगने पर प्रख्यात वकीलों राजीव धवन और इंदिरा जयसिंह ने उसके रूख का पक्ष लेते हुए कहा कि उप राज्यपाल के पास इस मामले में कोई स्वतंत्र विवेकाधिकार नहीं है।

उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता राजीव धवन ने अपने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री को अपनी पसंद का मुख्य सचिव रखने का अधिकार है और उप राज्यपाल ने ‘समस्या’ पैदा की है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मर्जी के खिलाफ, उप राज्यपाल नजीब जंग द्वारा कार्यकारी मुख्य सचिव के तौर पर शकुंतला गैमलिन की नियुक्ति किए जाने को लेकर धवन ने दिल्ली सरकार को दी गई अपनी राय में लिखा है ‘‘मुख्यमंत्री को अपनी पसंद का मुख्य सचिव रखने का पूरा अधिकार है। मेरी दृढ़ राय है कि यह संकट पूरी तरह उप राज्यपाल द्वारा उत्पन्न किया गया है।’’

दिल्ली सरकार को लिखे पत्र में धवन ने कहा है कि 40 घंटे गुजर जाना उप राज्यपाल के लिए मुख्यमंत्री पर अपनी पसंद थोपने का पर्याप्त कारण नहीं हैं, खास कर तब जब उनके ‘तत्कालिकता अधिकारों’ की बात तब ही उत्पन्न होती हो जब संदर्भ केंद्र सरकार के समक्ष लंबित हो।

उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल मुख्यमंत्री को सलाह दे सकते हैं।

धवन ने अपनी राय में कहा कि यह बिल्कुल साफ है कि उप राज्यपाल अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़ गए और उन्होंने अपने तथा मंत्रिपरिषद के संबंधों को उस दिशा में मोड़ दिया जहां लोकतंत्र और संविधान के लिए मुश्किल होती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने भी दिल्ली सरकार के नजरिये का पक्ष लिया है। उन्होंने कहा ‘‘ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे उप राज्यपाल को मुख्य सचिव की नियुक्ति के मामले में स्वविवेक से काम करने का अधिकार मिलता हो।’’

नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में जयसिंह ने बताया ‘‘मुख्य सचिव की नियुक्ति के प्रस्ताव पर नियमों के अनुसार सरकार को पहल करनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा ‘‘इस मुद्दे पर विचारों में मतभेद का सवाल तब ही उठता है जब मंत्रिपरिषद प्रस्ताव तैयार करे और उप राज्यपल के पास भेजे। इससे पहले विचार में मतभेद का सवाल ही नहीं उठ सकता।’’

जयसिंह ने कहा कि संविधान की लोकतांत्रिक व्यवस्था में मुख्य सचिव की नियुक्ति के मामले में उप राज्यपाल के पास कोई स्वतंत्र विवेकाधिकार नहीं है। ‘‘मुख्य सचिव के पद पर किसे नियुक्त किया जाए, यह फैसला केवल मंत्रिपरिषद का होना चाहिए और अगर उप राज्यपाल के विचार इस निर्णय पर अलग हैं तो उनकी भूमिका शुरू होती है। इसलिए मंत्रिपरिषद के फैसले का इंतजार किए बिना, उप राज्यपाल के लिए यह निर्णय करने का सवाल ही नहीं उठता कि मुख्य सचिव किसे नियुक्त किया जाए।’’

उपराज्यपाल नजीब जंग के साथ मुख्य सचिव की नियुक्ति पर टकराव के बीच आप सरकार ने कल अपने सभी अधिकारियों को, उप राज्यपाल से मिले मौखिक या लिखित आदेशों के बारे में उनका पालन करने से पहले मुख्यमंत्री, संबद्ध मंत्री या उनके कार्यालय को सूचित करने के लिए कहा है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के हस्ताक्षर वाले इस आदेश में कहा गया है कि मुख्य सचिव सहित सभी नौकरशाहों को उप राज्यपाल से मिले किसी भी निर्देश पर अमल करने से पहले, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों से परामर्श करना होगा।

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