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आप सरकार के सौ दिन का लेखा जोखा

आम आदमी पार्टी की सरकार अपने शासन के सौ दिन पूरे होने पर किए गए कार्यों की सूची लेकर दिल्लीवासियों के बीच जा रही है। आप के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल के सौ दिन पूरे कर लिए। इन सौ दिनों में पार्टी को काफी उथल-पुथल का सामना करना पड़ा।

Author May 25, 2015 10:37 AM
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आम आदमी पार्टी की सरकार अपने शासन के सौ दिन पूरे होने पर किए गए कार्यों की सूची लेकर दिल्लीवासियों के बीच जा रही है। आप के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल के सौ दिन पूरे कर लिए। इन सौ दिनों में पार्टी को काफी उथल-पुथल का सामना करना पड़ा।

पार्टी में दो फाड़ होने के साथ ही उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अधिकारों की जंग ने पार्टी को परेशानी में रखा। पार्टी दावा कर रही है कि बिजली दरों में 50 फीसद की कटौती और 20 हजार लीटर प्रति माह मुफ्त पानी मुहैया कराने के कुछ चुनावी वादों को लागू करना उल्लेखनीय रहा।

दिल्ली को देश का पहला भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाने के अपने घोषित मकसद को हासिल करने के लिए सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक हेल्पलाइन ‘1031’ फिर से शुरू की, जहां लोग भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए अधिकारियों के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। सरकार ने सोमवार को दिल्ली के सेंट्रल पार्क में एक विशाल समारोह के आयोजन की योजना बनाई है जहां समूची दिल्ली कैबिनेट इसकी उपलब्धियों को सार्वजनिक तौर पर पेश करने के लिए मौजूद होगी।

पार्टी लोगों को बताएगी कि अरविंद केजरीवाल की सरकार ने अनधिकृत कालोनियों के नियमन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है जबकि इसने कार्यकाल संभालने के फौरन बाद झुग्गियों को गिराने पर प्रतिबंध लगा दिया और ई-रिक्शा के लिए लाइसेंस मुहैया कराने को लेकर कई विशेष शिविरों का आयोजन किया। सरकार के 70 सूत्रीय विकास एजंडे को लागू करने के लिए एक नई संस्था ‘दिल्ली डायलॉग कमीशन’ का गठन किया गया जबकि शासन के मामलों में सहायता के लिए 21 विधायकों को संसदीय सचिव के तौर पर नियुक्त किया गया।

दिल्ली में वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 20 हजार रुपए की घोषणा के कुछ दिन बाद पार्टी रैली के दौरान एक किसान की आत्महत्या से इसके ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों तक अपनी पहुंच बनाने के प्रयास को गहरा धक्का लगा। वैसे प्रशासन के मोर्चे पर केजरीवाल को मुख्य सचिव के पद के लिए केंद्र की ओर से उनकी पसंद रहे रमेश नेगी के नाम को नामंजूर किए जाने के बाद केके शर्मा के नाम पर समझौता करना पड़ा।

शर्मा के दस दिन की छुट्टी पर जाने के बाद उपराज्यपाल नजीब जंग की ओर से शंकुतला गैमलिन को कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त करने पर बड़ा विवाद पैदा हो गया।

सरकार के खिलाफ साजिश रचने का लगातार आरोप लगाने वाले मुख्यमंत्री केजरीवाल के इस बयान की कड़ी आलोचना हुई कि मीडिया की ‘जन सुनवाई’ होनी चाहिए। बाद में सरकार ने मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद या सरकार की छवि को धूमिल करने वाले समाचार प्रकाशित या प्रसारित करने के लिए मीडिया हाउस के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज करने के लिए परिपत्र जारी किया, जिससे भी मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ। परिपत्र पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। इस दौरान केजरीवाल के विश्वासपात्रों और असंतुष्ट नेताओं योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के बीच जबर्दस्त मनमुटाव भी देखा गया। पिछले महीने ही दोनों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

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