सोशल मीडिया पर कई दिनों से नॉर्थ ईस्ट राज्य अरुणाचल प्रदेश पर धीरे-धीरे चीन के कब्जे के दावे खूब वायरल हो रहे थे। इसको लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को स्पष्टीकरण जारी किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कहा कि सोशल मीडिया पर जैसे भ्रामक दावे किए जा रहे हैं वह पूरी तरह से गलत हैं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में चीन का कोई दखल नहीं है। अरुणाचल प्रदेश “भारत का अविभाज्य और अभिन्न अंग” है।

‘इस सच्चाई को कोई बदल नहीं सकता’

भारत के विदेश मंत्रालय का यह जवाब ऐसे वक्त आया है जब सीमावर्ती राज्य अरुणाचल में भारत सरकार ने ही 27 जगहों के नाम बदल दिए। चीन इन जगहों पर अपना दावा करता है और इन स्थानों को ‘साउथ तिब्बत’ बोलता है। इन स्थानों को लेकर चीन का भारत के साथ विवाद भी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि मैं एक बार फिर दोहराना चाहता हूं कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और यह एक ऐसा तथ्य है जो पहले से ही स्पष्ट है। साथ ही मैं इस बात पर भी जोर देना चाहता हूं कि इस सच्चाई को कोई बदल भी नहीं सकता।

बॉर्डर पर सेना और ITBP तैयार

अरुणाचल प्रदेश में चीन की ओर से किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए ITBP और भारतीय सेना को तैयार रखा गया है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया है कि आर्मी और ITBP बॉर्डर पर दबदबा बनाने, चीनी गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें रोकने के लिए तैयार हैं। बिना डिटेल में जाए इस तरह के सनसनीखेज दावे ध्यान खींचने की चाल है जो चीन की ओर से फैलाई जा रही है।

‘हम सीमावर्ती इलाकों में शांति चाहते हैं’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत और चीन के बीच सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों पर बोलते हुए कहा कि हमने चीनी के साथ बातचीत में हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि हम इन मुद्दों को बहुत गंभीर मानते हैं और इन इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है। हमने यह भी कहा है कि हमारे सीमा मामलों की स्थिति का असर हमारे व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा।

भारत और चीन का सीमा विवाद

बता दें कि ⁠चीन का अरुणाचल पर दक्षिण तिब्बत होने का दावा है, जिसे 1960 की बॉर्डर बातचीत में बताया गया था। उसमें चीन ने दावा किया था कि अरुणाचल का लगभग 69,000 स्क्वायर मीटर इलाके पर उसका दावा है। ⁠1959 में चीन ने लोंगजू में असम राइफल्स की चौकी पर हमला किया और उस पर कब्जा कर लिया। तब से यह इलाका चीन के कब्जे में है और चीन द्वारा इस इलाके में किए गए इंफ्रा डेवलपमेंट की वजह से अक्सर खबरों में रहता है।

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान, कामेंग, सुबनसिरी, सियोम, सियांग और लोहित घाटियों में चीन के बड़े ऑपरेशन शुरू किए गए थे। हालांकि सीज़फ़ायर के बाद PLA LAC के उत्तर में वापस चला गया। अरुणाचल प्रदेश ग्रेट हिमालयन रेंज के साथ तिब्बत के साथ एक बड़ा बॉर्डर शेयर करता है। हाल के सालों में मिलकर इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देने से इलाके में PTLG और निगरानी को बेहतर बनाया गया है। बिना निशान वाली बॉर्डर वाली जगहों पर पेट्रोलिंग के दौरान अक्सर भारत और चीन के सैनिक भीड़ जाते हैं।

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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक पूर्व सैनिक की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। आरोप है कि वह पाकिस्तान स्थित खुफिया एजेंसियों से संपर्क में था और पैसे के बदले सेना की गतिविधियों के बारे में गोपनीय जानकारी साझा करता था। हाई कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना है। यहां पढ़ें पूरी खबर…