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अरुण शौरी बोले, दिशाहीन है मोदी सरकार की आर्थिक नीति

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मौजूदा सरकार की आर्थिक नीति दिशाहीन है, वहीं सामाजिक माहौल...

Author May 2, 2015 15:43 pm
अरुण शौरी बनाम भाजपा (एक्सप्रेस फ़ोटो)

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे अरुण शौरी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि मौजूदा सरकार की आर्थिक नीति दिशाहीन है, वहीं सामाजिक माहौल अल्पसंख्यकों के बीच काफी चिंता पैदा कर रहा है।

पत्रकार से नेता बने 73 वर्षीय शौरी ने कहा कि मोदी का एक साल का शासन आंशिक तौर पर अच्छा है, प्रधानमंत्री के रूप में विदेश नीति में उनकी ओर से किया गया बदलाव अच्छा है, लेकिन अर्थव्यवस्था में किए गए वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने मोदी सरकार का एक साल पूरा होने से पहले एक टीवी चैनल को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा, सरकार नीतियों से ज्यादा चिंतित सुर्खियों में रहने को लेकर रहती है। हालात ऐसे हैं कि एक ‘जिगसॉ पजल’ के कई टुकड़े इस तरह से बेतरतीब पड़े हैं कि उन्हें एक साथ जोड़ने के बारे में दिमाग में कोई बड़ी तस्वीर साफ नहीं है।


इन दिनों भाजपा में सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे शौरी ने कहा कि वादों के बावजूद पूर्वप्रभावी करों और उत्पादन के लिए प्रोत्साहनों पर विदेशी निवेशकों की आशंकाओं पर जमीनी काम नहीं दिखाई दिया है। उन्होंने कहा, निवेशकों को स्थिरता और पूर्वानुमान की क्षमता चाहिए।

शौरी ने कहा कि जाने-माने बैंकर दीपक पारेख द्वारा जमीनी हालात पर जताई गई चिंता को आगाह करने के तौर पर लिया जाना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या मोदी सरकार ने भारत को विकास के रास्ते पर बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रयास किए हैं तो उन्होंने कहा कि सब कुछ अतिशयोक्ति है। वाजपेयी सरकार में निवेश, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों का प्रभार संभाल चुके शौरी ने कहा, ‘इस तरह के दावे खबरों में बने रहने के लिए हैं, लेकिन इनमें दम नहीं है।’

उन्होंने कहा, सरकार आर्थिक विषयों पर बड़ी-बड़ी बातें कर रही हैं। लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हो रहा। कार्य निष्पादन नदारद है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का स्पष्ट संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के पास निवेशकों से निपटने में सुदृढ़ रुख की कमी है और ऐसे में वकीलों वाली दलीलें उन्हें नहीं मना सकतीं। उन्होंने कर संबंधी मुद्दों को संभालने के तरीके की भी आलोचना की जिसकी वजह से विदेशी निवेशक दूरी बना रहे हैं।

उन्होंने कहा, पहले इसने उन्हें अलग थलग कर दिया। लेकिन अब इसने उन्हें हंसने का मौका दे दिया। आप धौंस दिखाने वाले के रूप में आए हैं। शौरी ने कहा कि ईसाई संस्थानों पर हमलों की घटनाओं और ‘घर वापसी’ और ‘लव जेहाद’ जैसे अभियानों के मद्देनजर सामाजिक मोर्चे पर अल्पसंख्यकों के बीच अत्यंत चिंता की स्थिति है।

उन्होंने दक्षिणपंथी संगठनों की गतिविधियों और भाजपा के कुछ सांसदों व नेताओं के बयानों के मद्देनजर बने सामाजिक तनाव से जुड़े मुद्दों पर मोदी की ‘चुप्पी’ की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘जब सानिया मिर्जा चैंपियनशिप जीतती हैं तो आप ट्वीट करते हैं या जन्मदिन पर किसी को बधाई देते हैं। लेकिन नैतिक सवालों से जुड़े मसलों पर आप यह नहीं करते। लोगों को संदेह होता है कि वे चुप क्यों हैं।’

चर्चों पर हमलों की पृष्ठभूमि में बाहरी महसूस करने संबंधी पूर्व आइपीएस अधिकारी जूलियो रेबेरो की टिप्पणी का जिक्र करते हुए शौरी ने कहा कि जब इस कद के लोग इस तरह के बयान देते हैं तो साफ है कि चीजें बहुत दूर चली गईं हैं। ‘लव जेहाद’ और मुरादाबाद की हिंसा की घटना के संदर्भ में मुसलिम युवकों के अलग-थलग पड़ने की बात करते हुए शौरी ने कहा, अगर 100 मुसलिम युवक मिलकर आते हैं और कहते हैं कि हमें यहां न्याय नहीं मिल रहा तो हमें समस्या होती है।

शौरी ने मोदी के विवादास्पद बेशकीमती सूट का भी विषय उठाया और कहा: यह समझ से बाहर की और बड़ी गंभीर भूल थी। मुझे समझ नहीं आता कि उन्होंने सूट को लिया क्यों, और फिर उसे पहना क्यों। आप गांधीजी का नाम लेकर इस तरह की चीजें नहीं पहन सकते। अच्छी बात है कि उन्होंने जल्द ही इससे छुटकारा पा लिया।

अरुण शौरी
जब सानिया मिर्जा चैंपियनशिप जीतती हैं तो आप ट्वीट करते हैं या जन्मदिन पर किसी को बधाई देते हैं। लेकिन नैतिक सवालों से जुड़े मसलों पर आप यह नहीं करते। इससे लोगों को संदेह होता है और वे चुप्पी पर सवाल उठाते हैं।

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