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संघ और भाजपा के बीच की कड़ी बने अरुण कुमार

रष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार को भारतीय जनता पार्टी समेत राजनीतिक मुद्दों के लिए संघ का समन्वयक नियुक्त किया है।

अरुण कुमार। फाइल फोटो।

रष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार को भारतीय जनता पार्टी समेत राजनीतिक मुद्दों के लिए संघ का समन्वयक नियुक्त किया है। उन्होंने कृष्ण गोपाल का स्थान लिया है, जो साल 2015 से यह काम संभाल रहे थे। माना जा रहा है कि इससे संघ और भाजपा के बीच रिश्तों में भी नयापन देखने को मिल सकता है। मध्य प्रदेश के चित्रकूट में आरएसएस के प्रांत प्रचारकों की बैठक में इस बदलाव की घोषणा की गई।

अरुण ने हरियाणा के प्रांत प्रचारक का पद भी संभाला और जम्मू-कश्मीर में काफी लंबा समय बिताया है। समन्वयक की भाजपा के कामकाज की निगरानी में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। समन्वयक का कार्य संघ और पार्टी के बीच एक सहज समन्वय सुनिश्चित करना है। यह बदलाव सात राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले आया है। उत्तर प्रदेश सहित छह राज्यों में जहां भाजपा सत्ता में है, वहां पार्टी की साख दांव पर है। संघ और पार्टी दोनों इस धारणा को बदलने की तैयारी कर रहे हैं कि केंद्र और राज्यों में भाजपा सरकार कोरोना महामारी की दूसरी लहर के लिए तैयार नहीं थी।

अरुण कुमार, जो दिल्ली से हैं, वे पहले अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख का पद संभाल चुके हैं। अरुण की शिक्षा दिल्ली से ही पूरी हुई। वे दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। दिल्ली से ही वे संघ में प्रचारक हुए। पहले जिला प्रचारक बने, फिर विभाग प्रचारक का दायित्व निभाया और फिर हरियाणा प्रांत प्रचारक रहे। इसके बादे वे संघ में केंद्रीय पदाधिकारी बने। जम्मू-कश्मीर में प्रांत प्रचारक के तौर पर उन्होंने अहम भूमिका निभाई। जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र की परिकल्पना उनकी ही इच्छाशक्ति और निश्चय का प्रतिफल है।

साल 2004 में संघ ने अरुण को जम्मू-कश्मीर का प्रांत प्रचारक बनाकर भेजा। जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की सरकार ने जब बाबा अमरनाथ श्राइन बोर्ड भंग कर उसका नियंत्रण अपने हाथों में लिया तो उसका विरोध हुआ। आजाद की सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन चला। आखिरकार सरकार को फैसला बदलना पड़ा और फिर से श्राइन बोर्ड बहाल हुआ। लंबे आंदोलन को जनांदोलन का रूप देने और उसे परिणाम तक पहुंचाने में अरुण ने प्रभावी और निर्णायक भूमिका निभाई। उस आंदोलन की सफलता ने अरुण की सांगठनिक क्षमता से पहली बार संघ नेतृत्व को प्रभावित किया।

2011 आते-आते अरुण को संघ का राष्ट्रीय सह संपर्क प्रमुख बना दिया गया। तब अखिल भारतीय स्तर पर संपर्क प्रमुख का दायित्व मनमोहन वैद्य के पास था। 2018 में अरुण को अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख की जिम्मेदारी सौंप दी गई। मार्च, 2021 में जब दत्तात्रेय होसबले संघ के सरकार्यवाह बने तो अरुण को भी सह सरकार्यवाह की नई जिम्मेदारी मिली और इनका केंद्र भोपाल कर दिया गया।

संघ परिवार के एजंडे में हमेशा से ही जम्मू-कश्मीर की धारा 370 का सवाल रहा है। आम लोगों में इस विशेष प्रावधान से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं की समझ कम थी। संघ को जानने वालों का कहना है कि कश्मीर की धारा 370 और 35-एक से आम जन को अवगत कराने और राष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक विमर्श का विषय बनाने का एकमात्र श्रेय अरुण को जाता है। उन्होंने सबसे पहले पर्चे, पोस्टर, संगोष्ठी, सेमिनार आदि के माध्यम से लोगों विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।

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