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बिहार में सीट शेयरिंग हो या राफेल की ढाल, इन बड़े फैसलों के लिए याद किए जाते रहेंगे अरुण जेटली

Arun Jaitley Death News: जेटली ने हमेशा खुद को 'फ्रंट फुट' पर रखा। मोदी सरकार के हर बड़े फैसले के साथ उनका नाम जुड़ता रहा।

Author नई दिल्ली | Updated: August 24, 2019 7:36 PM
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली। फोटो: PTI

पूर्व वित्त मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का शनिवार को एम्स में निधन हो गया। वह 66 वर्ष के थे। जेटली का कई सप्ताह से एम्स में इलाज चल रहा था। जेटली ने अपने राजनीतिक जीवने में कई ऐसे बड़े फैसले लिए जिनके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा चाहे वह बिहार में सीट शेयरिंग हो या राफेल का मुद्दा। जेटली ने हमेशा खुद को ‘फ्रंट फुट’ पर रखा। मोदी सरकार के हर बड़े फैसले के साथ उनका नाम जुड़ता रहा। चाहे वह नोटबंदी हो या फिर जीएसटी, जनधन योजना, क्रेडिट गारंटी योजना। वह टैक्स सुधार की व्यवस्था को भी पटरी पर लेकर आए। मुद्रा योजना लागू करने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

बिहार में सीट शेयरिंग: जब भी बीजेपी या सरकार मुश्किल में फंसी, सभी पार्टी के ‘संकटमोचन’ कहे जाने वाले अरुण जेटली को याद करते थे। इसका एक उदाहरण इसी से लिया जा सकता है कि बिहार में एनडीए के बीच सीटों की शेयरिंग का मुद्दा फंसा तो जेटली एक बार फिर पार्टी के संकटमोचक बने। उन्होंने रामविलास पासवान से करीब घंटे भर लंबी मीटिंग की। सीटों का पेंच सुलझ गया। सीट शेयरिंग से पहले सभी यह मान बैठे थे कि रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बाद रामविलास पासवान भी एनडीए छोड़ सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और चुनाव परिणाम आए तो सीट शेयरिंग में शामिल सभी दलों को जबरदस्त जीत हासिल हुई।

‘एक देश, एक कर’: जेटली ने ‘एक देश, एक कर’ यानि की जीएसटी को लागू करने की पीछे में अहम भूमिका निभाई। जीएसटी को बहुत से लोग अब तक का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म कहते हैं। राज्यों को इसके लिए मनाना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्हें मनाने का श्रेय जेटली को ही जाता है। टैक्स कलेक्शन की इस नई व्यवस्था को सभी स्वीकार करें इसके लिए इसे आम उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचाने वाला बनाया गया।

आईबीसी: मोदी सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था में ढांचागत सुधार करते हुए 2016 मे इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) कानून को पारित किया था। आज इस कानून की वजह से बड़े-बड़े कर्ज लेकर उन्हें गटक जाने वाली कंपनियां और पूंजीपति डरे रहते हैं। इसे लागू करने के पीछे भी पूर्व वित्त मंत्री की अहम भूमिका रही।

नोटबंदी: नोटबंदी के एलान से पहले और बाद में जेटली की भूमिका को सबसे अहम माना जाता है। कहा जाता है कि सरकार के इस बड़े फैसले की जानकारी वित्तमंत्री जेटली और कुछ चुनिंदा लोगों को ही थी। 8 नवंबर 2016 को जेटली के वित्त मंत्री रहते हुए अभूतपूर्व फैसला लिया गया।

सिर्फ कपड़े और कुछ गहने ले भारत आया था जेटली का परिवार

जनधन योजना: अरुण जेटली के कार्यकाल में 28 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री जनधन योजना शुरू की गई थी। इस योजना तहत लोगों के घर-घर जाकर बैंक खाते खोले जा रहे हैं। योजना का मकसद देश के सभी परिवारों खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है जिसे सरकार सफलतापूर्वक पूरा कर रही है। आंकडों के मुताबिक अब तक करीब 33 करोड़ जनधन खाते खोले जा चुके हैं।

राफेल: 2019 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर लगातार हमलावर था। बीजेपी खुद को घिरता देख रही थी ऐसे में जेटली एक बार फिर संकटमोचन बने। उन्होंने लोकसभा में न सिर्फ अपने भाषण से विपक्ष के आरोपों की धज्जियां उड़ाई बल्कि पूरे विपक्ष को बैक फूट पर ला दिया।

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