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लंच के बाद पीएम नरेंद्र मोदी नहीं लौटे राज्‍यसभा तो अरुण जेटली ने दी सफाई- विपक्ष के पास कहने को कुछ था ही नहीं

जेटली ने उन विपक्षी दलों पर भी हमला बोला जिनके नेता किसी न किसी स्कैंडल में फंस चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्कैंडल से घिरे लोगों का दल ही आज नोट बैन के फैसले का विरोध कर रहा है।
केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली (दाएं) सहयोगी मंत्रियों ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल (बाएं) और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ ( फाइल फोटो-PTI)

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लंच के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राज्य सभा में नहीं आने पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कुछ कहने को नहीं था, इसलिए पीएम सदन में नहीं आए। जेटली ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देशभर के लोग डिमोनेटाइजेशन का स्वागत कर रहे हैं जबकि विपक्षी पार्टियां इस पर बेमतलब का हंगामा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कहने को कुछ नहीं है इसलिए वो चर्चा को टाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा नहीं चाहता और जब प्रधानमंत्री सदन में पहुंचे तो विपक्ष आश्चर्यचकित रह गया।

जेटली ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा चाहती है ताकि गतिरोध दूर हो सके। सरकार पहले सी सदन को फैसले के बारे में अवगत करा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष डिमोनेटाइजेशन को ब्लंडर कह रहा है जबकि वो कॉमनवेल्थ घोटाले और 2जी घोटाले को ब्लंडर कहने की सोच भी नहीं सकते।

जेटली ने उन विपक्षी दलों पर भी हमला बोला जिनके नेता किसी न किसी स्कैंडल में फंस चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्कैंडल से घिरे लोगों का दल ही आज नोट बैन के फैसले का विरोध कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि देश में सबसे ज्यादा काला धन साल 2004 से 2014 के बीच उत्पन्न हुआ है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र के पहले दिन इस मुद्दे पर चर्चा बिना किसी पूर्व शर्त के हुई लेकिन उसके अगले दिन से ही विपक्ष इस चर्चा में रोड़े अटका रहा है और अनर्गल तर्कें दे रहा है।

उधर, सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि नोटबंदी से चार लाख लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल उद्योगों में कार्यरत करीब 3.19 करोड़ मजदूरों को वेतन नहीं मिल पा रहा है।

वीडियो देखिए- राज्यसभा में नोटबंदी पर मनमोहन सिंह बोले- “फैसले के खिलाफ नहीं, लेकिन इसे लागू करने के तरीके से असहमत”

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