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अपनी कूची से शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा कलाकार

देश के लिए शहीद होने वाले सैनिकों को नमन करने के लिए चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता ने अनूठा तरीका अपना रखा है। शहीद होने वाले सैनिक के परिजनों..

देश के लिए शहीद होने वाले सैनिकों को नमन करने के लिए चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता ने अनूठा तरीका अपना रखा है। शहीद होने वाले सैनिक के परिजनों को अपने हाथों से उसका पोट्रेट बना कर भेंट करना अब उनकी धुन में सवार हो गया है। गुप्ता अब तक ढाई सौ शहीद सैनिकों के तैलचित्र बना कर उनके परिजनों को सौंप चुके है और अभी भी उनका काम जारी है। देश में 27 जुलाई को करगिल दिवस मनाया जाता है तो गुप्ता शहीदों को याद कर भावुक हो जाते है।

जयपुर के चित्रकार चंद्रप्रकाश गुप्ता अब शहीद सैनिकों के परिवारों में घुल-मिल गए हैं। करगिल युद्ध से शुरू हुआ गुप्ता का अभियान लगातार 16 साल से जारी है। गुप्ता पेशेवर चित्रकार हैं। करगिल युद्ध के दौरान राजस्थान से बहुत बड़ी संख्या में सैनिक शहीद हुए थे। उस समय युवा चित्रकार गुप्ता का मन झकझोर गया। उन्होंने शहीदों की याद को बनाए रखने के लिए अपने हुनर को उसके लिए सपर्पित कर दिया। गुप्ता ने बताया कि करगिल में राजस्थान के 74 सैनिक शहीद हुए थे। प्रदेश से सबसे पहले कोटा निवासी एअरफोर्स के अजय आहूजा शहीद हुए। गुप्ता ने उनका तैलचित्र बना कर जब उनके माता-पिता को भेंट किया तो सबकी आंखें नम हो गर्इं। आहूजा के माता-पिता का दर्द देखने के बाद ही गुप्ता ने शहीदों को अपनी तरफ से नमन करने का अलग ही तरीका अपनाया है।

गुप्ता का कहना है कि जून 1999 से शहीदों के तैलचित्र बनाने का अभियान शुरू किया था। यह काम अभी तक चल रहा है। देश में सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को बाहरी और आंतरिक दुश्मनों से लोहा लेना पड़ता है। जवान अपनी जान की परवाह भी नहीं करके मौत को गले लगा लेते हैं। सैनिकों की इसी बहादुरी को सलाम करने के लिए उन्होंने अपनी कला को समर्पित करने का फैसला किया। जम्मू कश्मीर, असम के साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों और नक्सली वारदातों में अपनी जान गंवाने वाले राजस्थान के जवानों को नमन करने के लिए उनकी कूची चलती है। गुप्ता शहीदों के चित्र बना कर खुद जाकर शहीद के परिजनों को सौंपते हैं। ऐसे समय में परिजन अपने लाडले के देश के लिए शहीद होने के पल को याद करते हुए गर्व महसूस करते है।

शहीदों के तैलचित्र गुप्ता अपने निजी खर्चें से ही बनाते हैं। उनके इस अनूठे काम को शहीदों के घरवालों के साथ ही कई लोग बड़ा सम्मान देते है। गुप्ता को मलाल है कि लगातार 16 साल से वे इस काम को कर रहे हैं। समाज के लोग तो सम्मान देते हैं पर सरकार का ध्यान कभी इस तरफ नहीं गया। गुप्ता का कहना है कि वे राजस्थान के शहीदों की याद को बनाए रखने के लिए जुटे हुए हैं और सरकार से उन्हें मदद की कोई उम्मीद भी नहीं है। उनका कहना है कि देश के लिए मरने वालों को वे हमेशा अपनी तरफ से याद करते रहेंगे। गुप्ता इन दिनों शहीद हेमराज का चित्र तैयार करने में लगे हैं। हेमराज का सिर पाक सैनिक काट ले गए थे। गुप्ता का कहना है कि हेमराज का तैलचित्र बना कर उनके परिजनों को सौंपने वे मथुरा जाएंगे।

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