J&K का हाल: अपनों की खोज-खबर लेने मारे-मारे फिर रहे लोग, एक से बढ़कर एक कर रहे जतन

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के अधिकतर प्रावधान खत्म होने के बाद घाटी में इंटरनेट, टेलिफोन आदि सेवाओं पर बंदिशें हैं। इससे यहां के आम लोगों की जिंदगी पर काफी असर पड़ा है।

article 370शनिवार को श्रीनगर में फोन का इस्तेमाल करने के लिए एक अधिकारी के आसपास लोगों की भीड़। (reuters)

J&K को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 के प्रावधानों को खत्म करने के बीच घाटी में इंटरनेट, टेलिफोन आदि सेवाओं पर बंदिशें हैं। इन पाबंदियों का यहां के आम लोगों की जिंदगी पर काफी असर पड़ा है। लोग अपने प्रियजनों से संपर्क करने की उम्मीद लिए उन सरकारी दफ्तरों के बाहर कतारों में खड़े हैं, जहां टेलिफोन काम कर रहे हैं। वहीं, ये लोग सैटेलाइट न्यूज चैनल के ओबी वैन वालों से भी मदद मांग रहे हैं ताकि किसी तरह बाहर रह रहे अपने घरवालों से एक बार बात कर सकें।

रविवार रात इन पाबंदियों के प्रभाव में आने के बाद सोपोर के रहने वाले नजीर अहमद अपनी बहन से संपर्क करने के लिए मारे मारे फिरते नजर आए। उनकी बहन चंडीगढ़ की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं। नजीर मंगलवार को पहले एक स्थानीय बीएसएनएल एक्सचेंज गए। वहां उन्हें बताया गया कि सर्वर डाउन है। इसके बाद, अगले दिन वह श्रीनगर एयरपोर्ट गए।

वह किसी ऐसे शख्स की तलाश में थे, जो चंडीगढ़ जा रहा हो। उन्होंने बताया, ‘मैंने अपनी बहन का नंबर उस शख्स को दिया और उससे दरख्वास्त की कि वह प्लेन के चंडीगढ़ पहुंचते ही उसे कॉल कर ले।’ अहमद के मुताबिक, वह श्रीनगर के बीएसएनएल एक्सचेंज और स्थानीय डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर भी गए लेकिन उन्हें एंट्री नहीं मिली।

गुरुवार दोपहर को एक पुलिसवाले के फोन के जरिए अहमद किसी तरह अपनी बहन से बात कर पाए। अहमद के मुताबिक, बहन ने बताया कि वह घर आ रही है और रविवार को पहुंच जाएगी। अहमद ने कहा, ‘उसने बताया कि चंडीगढ़ में रहना सेफ नहीं है।’ बता दें कि सरकार ने लोगों की मदद के लिए 300 टेलिफोन बूथ लगवाने का दावा किया है। हालांकि, लोगों को यह जानकारी नहीं है कि ये टेलिफोन बूथ आखिर हैं कहां?

श्रीनगर के एक स्थानीय बाशिंदे ने कहा, ‘अगर हमें पता भी चल जाए कि ये टेलिफोन कहां लगे हैं तो हम वहां तक कैसे पहुंचेंगे? उन्होंने सड़क पर बैरिकेड लगा रखे हैं और कर्फ्यू पास मांगते हैं। हमें वे पास कैसे मिल पाएंगे?’ वहीं, ओल्ड श्रीनगर में रहने वाले 55 साल के अली मोहम्मद की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्हें दिल्ली में काम करने वाली अपनी बेटी से संपर्क करने के लिए तीन दिन तक संघर्ष करना पड़ा।

सोमवार को एक रिश्तेदार के जरिए अली मोहम्मद ने बेटी को संदेश भिजवाया कि वह ठीक हैं। साथ ही बेटी से कहा कि वह उनका डिश टीवी रिचार्ज करा दे जो शनिवार से चलना बंद हो गया है। बुधवार शाम उन्हें दिल्ली से आ रहे एक कॉमन फ्रेंड के जरिए बेटी की चिट्ठी मिली। इसमें बेटी ने बताया कि वह ठीक है और उसने डिश टीवी रिचार्ज करा दिया है।

उधर, मोहम्मद इद्रीस नई दिल्ली स्थित एक समाचार चैनल के दफ्तर पहुंचे और उनसे दरख्वास्त की कि घाटी के रिपोर्टर के जरिए उनके पिता को एक संदेश भेजने में मदद करें। रिपोर्टर ने इद्रिस के पिता से संपर्क किया और बताया कि उनका बेटा सुरक्षित है और उनसे बात करना चाहता है। पिता ने बताया कि चैनल वालों ने अपने सैटेलाइट फोन से उनकी बेटे से बात करवाई। इसके बाद से वह बेहद निश्चिंत महसूस कर रहे हैं।

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