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Article 370: पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व पुलिस अफसर ने उठाए मोदी सरकार के फैसले पर सवाल

Article 370: रिबेरो ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनने का अनुरोध किया था और जब उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को उन्हें राजी करने की जिम्मेदारी सौंपी।

Author नई दिल्ली | Updated: August 25, 2019 1:10 PM
Article 370, jammu kashmir, Atal Bihari Vajpayee, धारा 370, जम्मू कश्मीर, अटल बिहारी वाजपेयी, Julio Ribeiro, police officer,Punjab Police, कश्मीर, kashmir situtaion, Julio Ribeiro, india news, news, jansatta newsपूर्व पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में केंद्र सरकार के हालिया फैसले पर सवाल उठाए। (Indian express file)

Article 370, jammu kashmir: पंजाब पुलिस प्रमुख के रूप में उग्रवाद से निपटने में अहम भूमिका निभाने वाले एवं पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में केंद्र सरकार के हालिया फैसले को एक पुलिसकर्मी के नजरिए से तो पूरे अंक दिए लेकिन ‘‘नैतिकता’’ के दृष्टिकोण से इस पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसे मामलों में लोगों की इच्छा ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘‘नैतिकता’’ के दृष्टिकोण से वह ऐसा फैसला कभी नहीं लेते जैसा केंद्र सरकार ने लिया है।

1980 के दशक में पुलिस प्रमुख के रूप में पंजाब में उग्रवाद से सख्ती से निपटने के लिए जाने जाने वाले रिबेरो ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘एक पुलिसकर्मी के तौर पर यदि आपको यह सुनिश्चित करना है कि कोई दिक्कत पैदा न हो, तो यह बहुत चतुराई से किया गया । पुलिस के नजरिए से, मैं इसे पूरे नंबर दूंगा, लेकिन नैतिकता के आधार से मैं ऐसा नहीं करूंगा। लोगों को शामिल किया जाना चाहिए।’’ केंद्र ने पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को निरस्त कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था।

पूर्व पुलिस आयुक्त ने कहा, ‘‘लोगों को अपने विश्वास में लेना सबसे महत्वपूर्ण बात है और उसे (सरकार को) ऐसा करना ही होगा, अन्यथा आपको समस्या होगी। लोगों को अपने पक्ष में करना ही मामले का मूल आधार है।’’ रिबेरो ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनने का अनुरोध किया था और जब उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को उन्हें राजी करने की जिम्मेदारी सौंपी। वाजपेयी को यह पता चला था कि वह लोगों को विश्वास में लेकर किस प्रकार पंजाब में उग्रवाद से निपटे और वह कश्मीर में भी ऐसा ही करना चाहते थे।
रिबेरो ने कहा, ‘‘मैंने कहा कि राज्यपाल के तौर पर मैं ऐसा नहीं कर सकता। मैं पुलिस महानिदेशक या राज्यपाल के सलाहकार के तौर पर ऐसा कर सकता हूं, लेकिन राज्यपाल के तौर पर मैं ऐसा नहीं कर सकता।’’ उल्लेखनीय है कि कुछ मीडिया संस्थानों खासकर विदेशी स्वामित्व वाले संस्थानों ने कश्मीर घाटी में हिंसा में कुछ लोगों के घायल होने की खबर दी है।

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