आंदोलन के नाम पर हमारे बच्चों को दूध न मिले, ये नामंजूर है- पैनलिस्ट पर चीखने लगे अर्णब, देखें फिर क्या हुआ

किसान आंदोलन को लेकर पैनलिस्ट पर अर्नब गोस्वामी बरस पड़े। उन्होंने कहा, धमकी वाला आंदोलन हमें मंजूर नहीं है। हमारे बच्चों को दूध न मिले, यह हमें मंजूर नहीं है।

Farmers protest, arnab goswamiकिसान आंदोलन को लेकर बरसे अर्नब गोस्वामी। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

किसानों और सरकार के बीच शुक्रवार को आठवें चरण की बातचीत हुई जो कि बेनतीजा रही। अब अगली बैठक की तारीख 15 जनवरी निश्चित कर दी गई है। किसान कानून को वापस लेने की बात पर अड़े हुए हैं और सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। रिपब्लिट भारत के डिबेट शो में इसी मुद्दे पर अर्नब गोस्वामी पैनलिस्ट पर चीखने लगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन के नाम पर बच्चों को दूध न मिले, यह मंजूर नहीं है।

अर्नब गोस्वामी ने किसान नेता से कहा, ‘हम आपकी हर बात मान लेंगे लेकिन आपकी वजह बेगुनाह लोग परेशान हों, हमें मंजूर नहीं है। आंदोलन के नाम पर लोगों में डर बैठाया जाए, हमें मंजूर नहीं है। आंदोलन की वजह से हमारे बच्चों को दूध न मिले, हमें मंजूर नहीं है। आंदोलन की वजह से हमारा परिवार डर डरके जिए हमें मंजूर नहीं है। धमकी वाला आंदोलन हमें मंजूर नहीं है।’

अर्नब की इस बात पर पैनलिस्ट अकाली दल नेता ने कहा, ‘मैं आपको विनती करना चाहता हूं कि इस बात का मुझे बहुत दुख हुआ है। आप अकाली दल पर गलत आरोप लगा रहे हैं। अकाली दल ने इंदिरा गांधी की इमर्जेंसी के विरुद्ध शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। उसी अकाली दल को अर्नब अगर पाठ पढ़ाएं कि हिंसा न करें तो यह अस्वीकार्य बात है। अकाली दल ने हमेशा शांति से लड़ाई लड़ी है। मैं चाहता हूं कि सरकार आपकी बात मानती है तो आप उसे समझाएं।’

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसके बाद कहा, ‘बादल ने जो भूमिका निभाई है वह स्वतंत्र भारत में सबसे ज्यादा समय जेल में रहने वाले नेता हैं। उनसे वरिष्ठ कोई नेता नहीं है। इस आंदोलन में कोई चौधरी देवीलाल नजर क्यों नहीं आ रहा है। कोई एक नेता ही नहीं है जो सामने बैठकर सरकार से बात कर सके। दूसरी बात है कि हम आपकी बात पर विचार करने को तैयार हैं लेकिन क्या 2008 में इसी बात पर आंदोलन नहीं हुआ था कि हमें मंडी से मुक्त किया जाए जिससे हम बाजार में अपनी फसल बेच सके?’

त्रिवेदी ने कहा, हर बार बयान बदलते रहते हैं। हमें सबका ध्यान रखना है। आपने ट्रैक्टर रैली निकाली। 61 करोड़ किसानों में 40 करोड़ ऐसे हैं जिनके पास बैलों की जोड़ी भी नहीं है। लोगों के पास राशन नहीं है। हमें संपन्न का भी ध्यान रखना है और विपन्न का भी ध्यान रखना है।

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