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कथित राष्‍ट्रवादियों पर भड़के अरनब, पूछा- मैं हमेशा राष्‍ट्रगान पर खड़ा होऊंगा और सेना के पक्ष में बोलूंगा तो क्‍या मैं संघी हो गया?

गोस्‍वामी ने कहा कि जिन्‍होंने पिछले साल फरवरी में जेएनयू में नारे लगाए थे, वह तब कुछ नहीं बोले जब उरी हमले में 19 सैनिक मार दिए गए।

अरनब ने कहा कि विरोध की प्रत्‍येक आवाज बुलंद और अखबार में आठ कॉलम की खबर होनी चाहिए।

‘अभिव्‍यक्ति की आजादी’ पर जारी बहस में मशहूर पत्रकार अरनब गोस्‍वामी भी कूद पड़े हैं। चेन्‍नई में FICCI FLO के एक कार्यक्रम में बोलते हुए अरनब ने 21 फरवरी को गुस्‍से में दर्शकों से पूछा, ”मैं हमेशा राष्‍ट्रगान के लिए खड़ा होऊंगा और भारतीय सेना के पक्ष में बोलूंगा। क्‍या इससे मैं संघी बन जाऊंगा?” अपना नया टीवी चैनल ‘रिपब्लिक’ लॉन्‍च करने को तैयार अरनब की आवाज में गुस्‍सा था। वह देश के ‘स्‍यूडो लिबरल्‍स’ पर भड़के थे कि आखिर चुनिंदा मौकों पर असहिष्‍णुता पर बहस क्‍यों छेड़ी जाती है। उन्‍होंने कहा, ”सहनशील लोग आखिर असहनशील क्‍यों हैं और क्‍या हम इस गणतंत्र में इसे सहन कर सकते हैं। गोस्‍वामी ने निर्भया रेप कांड पर लेस्‍ली उदविन की एक डॉक्‍युमेंट्री के संदर्भ में बोलते हुए कहा, ”विडंबना तो ये थी कि लुटियंस, दिल्‍ली में स्‍व-घोषित सहिष्‍णु और लिबरल मीडिया राष्‍ट्रीय और ग्‍लोबल टेलीविजन का प्राइम टाइम एक रेपिस्‍ट को देना चाहते थे।” पिछले साल जेएनयू में हुए हंगामे को उठाते हुए गोस्‍वामी ने कहा कि जिन्‍होंने पिछले साल फरवरी में जेएनयू में नारे लगाए थे, वह तब कुछ नहीं बोले जब उरी हमले में 19 सैनिक मार दिए गए।

अरनब ने कहा, ”तब कोई कैंडल मार्च नहीं हुआ, कोई याचिका नहीं डाली गई। जेएनयू शांत था। कन्‍हैया गायब हो गया, वह कहीं नहीं दिख रहा था। तब हक के लिए कोई आवाज नहीं उठी। पाखंड तो देखिए कि वही लॉबी जो अपनी सुविधानुसार खुद को राष्‍ट्रहित का ध्‍वजवाहक बताती है, ने तब कोई प्रदर्शन नहीं किया जब उरी (हमला) हुआ।” अरनब ने पूछा, ”क्‍या इस गणतंत्र में उन लोगों के प्रति सहनशीलता होनी चाहिए जो देश को नीचा दिखाते हैं?”

अरनब का गुस्‍सा यहीं नहीं थमा। उन्‍होंने आगे कहा, ”माओवादियों को हिंसा छोड़ने के लिए कहना असहिष्‍णुता क्‍यों है? या फिर अवार्ड वापस करने वालों की सेलेक्टिव हिपोक्रेसी पर सवाल खड़े करना असहिष्‍णु क्‍यों है? और राष्‍ट्रगान के लिए खड़ा होने से इनकार करने पर सवाल खड़े करना उदारवादी सोच क्‍यों नहीं है?” उन्‍होंने साफ किया, ”हिपोक्रेसी के खिलाफ हम सबकी संयुक्‍त इनटॉलरेंस ही आज शाम का प्‍वॉइंट है।”

जल्‍लीकट्टू को ‘अमानवीय’ परंपरा बताने वालों पर भी अरनब खूब बरसे। उन्‍होंने कहा, ”आखिर क्‍यों, जो खुद को टॉलरेंट और लिबरल कहते हैं, और जिन्‍होंने इस पर (जल्‍लीकट्टू) पर बोला, उनमें से एक ने भी ये नहीं कहा कि ग्रीन पीस नियम तोड़ रही थी। ये वही लोग हैं जिन्‍होंने जल्‍लीकट्टू का विरोध किया था। मुझे इसमें कोई मतलब दिखाई देता है।”

अरनब का पूरा भाषण देखें: 

अरनब गोस्‍वामी: द न्‍यूजऑवर पर इन 5 बहसों ने खूब बटोरीं सुर्खियां

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