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सर्जिकल स्‍ट्राइक में सेना ने किया था तेंदुए के पेशाब और मल का इस्‍तेमाल, जानिए क्‍यों

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए योजना बनाते वक्त इस बात पर चर्चा हुई कि इलाके के गांवों को पार करते वक्त यह मुमकिन है कि कुत्ते किसी इंसान का गंध पाकर भौंकने लगें। कुत्तों को चकमा देने के लिए सेना के जवानों ने तेंदुओं के पेशाब और उनका ढेर सारा मल भी अपने साथ रख लिया।

उरी आर्मी कैंप पर आतंकवादी हमले के बाद भारत ने एलओसी पार करके पीओके के आतंकी ठिकानों पर की थी सर्जिकल स्ट्राइक। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

साल 2016 में उरी में सेना के कैंप पर हुए हमले के बाद देश के बहादुर जवानों ने पीओके में घुसकर आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक किया था। सर्जिकल स्ट्राइक में आतंकवादियों को बड़ा नुकसान हुआ था। पूर्व Nagrota Corps commander लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र निंबोरकर को सर्जिकल स्ट्राइक को कामयाब बनाने में उनके योगदान के लिए वरिष्ठ बाजीराव पेशवा शौर्य पुरस्कार से नवाजा गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने राजेंद्र निंबोरकर को सम्मानित किया। लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र निंबोरकर ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान बतलाया है कि सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान आर्मी के जवानों ने तेंदुए के मल और पेशाब का भी इस्तेमाल किया था। दरअसल निंबोरकर नौशेरा सेक्टर में कमांडर थे। इस दौरान उन्होंने इलाके की जैवविविधता (biodiversity) का गहन अध्ययन किया था। अपनी स्टडी में उन्होंने पाया कि इस इलाके में तेंदुए अक्सर कुत्तों पर हमला करते हैं। तेंदुओं के हमले से बचने के लिए कुत्ते अक्सर रात के वक्त इस इलाके में छिप कर रहते हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए योजना बनाते वक्त इस बात पर चर्चा हुई कि इलाके के गांवों को पार करते वक्त यह मुमकिन है कि कुत्ते किसी इंसान का गंध पाकर भौंकने लगें। कुत्तों को चकमा देने के लिए सेना के जवानों ने तेंदुओं के पेशाब और उनका ढेर सारा मल भी अपने साथ रख लिया। जवानों ने मल और पेशाब को गांवों के रास्ते में छिड़क दिया। यह तरकीब काम कर गई। तेंदुए की गंध पाकर इलाके के कुत्ते चुपचाप दुबके रहे और बहादुर जवानों ने अंधेरे में गांव को आसानी से पार कर लिया।

निंबोरकर ने बतलाया कि आर्मी ने काफी गोपनीयता बरती। जिसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस मिशन को एक हफ्ते के अंदर पूरा करने का निर्देश दिया। निंबोरकर ने अपने यूनिट के जवानों से सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में चर्चा की थी लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक की जगह का पता इन जवानों को हमले से एक दिन पहले ही दी गई। निंबोरकर ने बतलाया कि हमने ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए सुबह का वक्त चुना। हमने आतंकियों के लॉन्च पैड की पहचान की, उनके समय के बारे में जानकारी हासिल की और फिर यह तय किया की सुबह 3.30 मिनट का समय उनपर हमला करने के लिए सबसे उपयुक्त होगा। जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान आतंकियों के तीन लॉन्चिंग पैड नष्ट कर दिये और 29 आतंकवादियों को मार गिराया।

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