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जवान के प‍िता ने अपने अस्‍पताल में बेटे का क‍िया इलाज, सेना से मांगे 16 करोड़ रुपए

मध्य प्रदेश के भिंड जिला निवासी एक जवान ने मेडिकल एक्सपेंस के तौर पर सेना से 16 करोड़ रुपये मांगे हैं। जवान सौरव राजावत के पिता डॉक्टर आईएस राजावत ने ही उनका इलाज किया था। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है। डॉ. राजावत ने बताया कि उन्होंने 1.6 लाख रुपये का बिल भेजा था। यह 16 करोड़ रुपये कैसे हो गया उन्हें नहीं मालूम।

भारतीय सेना के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर।

मध्य प्रदेश में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भिंड के एक आयुर्वेदिक अस्पताल ने सेना के इनफेंट्री रेजीमेंट में तैनात एक जवान के सिर में लगी चोट का इलाज करने के एवज में सेना पर 16 करोड़ रुपये का दावा ठोका है। जवान की पहचान सौरव राजावत के तौर पर की गई है। दिलचस्प है कि जवान सौरव के पिता ही अस्पताल के मालिक भी हैं। पिता ने अपने बेटे का इलाज किया और इसके बदले करोड़ों रुपये का दावा ठोक दिया। ‘इंडिया टुडे’ के अनुसार, डॉक्टर आईएस राजावत की ओर से मुआवजे के तौर पर भारी-भरकम राशि का क्लेम किया गया है। उनका अस्पताल जिले के रोन इलाके में स्थित है। भिंड जिला प्रशासन ने बताया कि डॉ. आईएस राजावत ने अपने बेटे सौरव का वर्ष 2014-17 के बीच इलाज किया था और मेडिकल एक्सपेंस के तौर पर सेना से 16 करोड़ रुपये की मांग कर डाली। जवान के पिता का आयुर्वेदिक अस्पताल है, लेकिन उपचार एलोपैथिक दवाइयों के जरिये किया गया। सेना ने जिला प्रशासन से अस्पताल की कार्यप्रणाली के बारे में पता लगाने को कहा था। बता दें कि वर्ष 2013 में सौरव सेना में तैनाती के दौरान ही घायल हो गए थे। उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं। शुरुआत में उनका इलाज एक निजी अस्पताल में किया गया था।

भिंड जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि सौरव राजावत वर्ष 2014 में घर आए थे। वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हुए थे। इसके बाद उनके पिता ने उनका इलाज शुरू कर दिया था। अधिकारी ने बताया कि सौरव का वर्ष 2017 तक चला जब वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। सौरव ने मेडिकल रिइम्बर्समेंट के तौर पर सेना से 16 करोड़ रुपये देने की मांग की थी, तब जाकर यह मामला प्रकाश में आया था। सेना ने मामले को छानबीन के लिए भिंड के कलेक्टर के पास भेजा था। कलेक्टर ने मामले को चीफ मेडिकल ऑफिसर के सुपुर्द किया था। सौरव ने सेना को मेडिकल एक्सपेंस के तौर पर तीन बिल (छह करोड़, छह करोड़ और चार करोड़ रुपये) भेजे थे। स्थानीय प्रशासन की एक टीम ने 7 जून को अस्पताल का दौरा किया और अगले आदेश तक के लिए सील कर दिया। वहीं, सौरव के पता डॉ. आईएस. राजावत ने सभी आरोपों को सिरे से खारित किया है। उन्होंने कहा, ‘मैंने तीन बिल जमा कराए थे। दो बिल 60-60 हजार और तीसरा 40 हजार रुपये का था। कुल मिलाकर 1.6 लाख रुपये का दावा किया गया था। मुझे नहीं पता यह 16 करोड़ रुपये कैसे हो गया।’ उन्होंने उलटे सेना पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सेना के आला अधिकारी इस बात को छुपाने में जुटे थे कि उनके बेटे के सिर पर सुबेदार ने रॉड से हमला किया था।

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