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रिटायर्ड सैन्य अफसरों पर लगाम कसने के लिए कोड ऑफ कंडक्ट बना रहा आर्मी हेडक्वॉर्टर? भड़के वेटरन

लोकसभा चुनाव के दरमियान 150 से ज्यादा दिग्गजों ने एक सार्वजनिक पत्र लिखा था। इसमें सीमापार हमलों जैसे सैन्य अभियानों के लिए श्रेय, और यहां तक की सुरक्षा बलों को 'मोदी जी की सेना' होने का दावा करने के लिए नेताओं की कोशिशों पर नाराजगी जताई गई थी।

Author नई दिल्ली | Published on: November 5, 2019 8:43 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (Source: Reuters)

सेना से जुड़े रहे कुछ दिग्गजों ने रिटायर्ड अधिकारियों के लिए कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) बनाने के लिए आर्मी हेडक्वॉर्टर के प्रस्ताव की आलोचना की है। दिग्गज इसे सुरक्षा बलों या सरकार की किसी सार्वजनिक आलोचना को नाकाम करने के तरीके रूप में देख रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल (बीते सप्ताह रिटायर्ड हुए पूर्व आर्मी एडजुटेंट जनरल) अश्विनी कुमार ने बीते शनिवार को एक टीवी चैनल के जरिए यह जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि सेना मुख्यालय सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए आचार संहिता पर काम कर रहा था। इसी बीच सेना के इस विचार को कुछ वेटरन ने ‘मूर्खतापूर्ण’, ‘बुद्धिहीन’ और ‘हास्यास्पद’ बताया है।

सेना के प्रस्ताव पर रिटायर्ड कर्नल अशोक ने ट्वीट कर कहा, ‘रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों के लिए कोड ऑफ कंडक्ट? इसके लिए संविधान 2 और आर्मी एक्ट में संशोधन की जरुरत होगी। यह एक बेवकूफी भरा काम लग रहा है।’ अपनी पोस्ट में कर्नल अशोक के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए रिटायर्ड ब्रिगेडियर वी महालिंगम रविवार को ट्वीट कर लिखते हैं, ‘अगर यह सच है। मैं आपसे सहमत हूं। पूरी तरह मूर्खतापूर्ण। वो क्या सोचते हैं कि वो क्या हैं? भारत अभी तक चीन नहीं है।’

बता दें कि सेना में कार्यरत सैन्यकर्मी में इस एक्ट में आते हैं मगर दिग्गजों को इसके द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है, फिर चाहे उन्हें रिटायर्ड होने के बाद अपनी रैंक बरकरार रखने की अनुमति दी गई हो। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक आर्मी हेडक्वॉर्टर में तैनात एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों के रिटायरमेंट के समय, एक अंडरटेकिंग देने के बारे में चर्चा चल रही थी। ये कोड ऑप कंडक्ट का पालन करने के बारे में था।

द टेलीग्राफ में छपी खबर के मुताबिक अधिकारी ने आगे कहा, ‘कुछ वेटरन ने कुछ सरकारी नीतियों की खूब आलोचना की थी और सोशल मीडिया पर नापसंद कमेंट पोस्ट किए। इससे सेना की छवि धूमिल हो गई थी।’ अधिकारी ने आगे कहा कि इसी लिए आचार संहिता की रूपरेखा तैयार करने की कोशिश की गई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किसी भी रिटायर्ड सीनियर द्वारा कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करने पर क्या सजा दी जाएगी।

एक वेटरन ने नाम ना छापने की शर्त पर टेलीग्राफ को बताया, ‘पिछले दो-तीन सालों में दिग्गजों द्वारा सरकार और सेना की आलोचना करने के जवाब में उठाया गया ये बेहूदा कदम है।’

बता दें कि लोकसभा चुनाव के दरमियान 150 से ज्यादा दिग्गजों ने एक सार्वजनिक पत्र लिखा था। इसमें सीमापार हमलों जैसे सैन्य अभियानों के लिए श्रेय, और यहां तक की सुरक्षा बलों को ‘मोदी जी की सेना’ होने का दावा करने के लिए नेताओं की कोशिशों पर नाराजगी जताई गई थी।

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