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भारतीय सेना के कमांडोज को और खूंखार बनाने में जुटी नरेंद्र मोदी सरकार, अत्याधुनिक हथियार खरीदने की तैयारी

13 लाख सैनिकों वाली भारतीय सेना में बेहद प्रशिक्षित विशेष टुकड़ियां हैं, जिसमें 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज और 5 पैरा एयरबोर्न बटालियन हैं।

इन सभी को स्पेशल फोर्स का कमांडो बनने के लिए कड़े शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।

पीओके में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने के बाद भारतीय सेना के हौसले और बुलंद हो गए हैं और इसी के साथ भारतीय फौज ने अपनी विशेष टुकड़ी ( स्पेशल फोर्सेज) को और ज्यादा खतरनाक बनाने की तैयारी कर ली है। सेना को आधुनिक बनाने से जुड़ी खरीद-फरोख्त काफी समय से लंबित पड़ी है, जिसमें अब तेजी लाई जा रही है। भारत ने 2015 में म्यांमार और फिर उड़ी हमले के बाद सितंबर 2016 में पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक्स किए थे।

टाइम्स अॉफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि सेना के लिए हथियार खरीदने के मसकद से कंपनियों को चुनाव करने के लिए प्रतिबंधित निविदाएं निकाली गई हैं। इनके जरिए असाल्ट राइफल्स, स्नाइपर राइफल्स, जनरल परपज मशीन गन्स, हल्के रॉकेट लॉन्चर्स, शॉटगन, पिस्टल्स, नाइट विजन डिवाइस और गोला बारूद खरीदे जाएंगे। सूत्र ने बताया कि पिछले हफ्ते एेसे 7 टेंडर अमेरिकी, इस्राइली, स्वीडन और बाकी कंपनियों को भेजे गए थे, ताकि इस प्रक्रिया को जल्दी पूरा किया जा सके।

एक दूसरे प्रोजेक्ट के तहत 120 हल्के मारक वाहन खरीदने के लिए ट्रायल चल रहे हैं। विशेष टुकड़ी के लिए इन वाहनों को हेलिकॉप्टरों के जरिए ढोया जा सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने एक इमरजेंसी सौदे को मंजूरी दी थी, जिसके तहत नौसेना, थलसेना और वायुसेना के लिए 20 हजार करोड़ रुपये के हथियार और कलपुर्जे खरीदे जाएंगे। ताकि वह कम समय में भी युद्ध में उतरने के लिए तैयार रहें और कम से कम 10 दिनों तक बड़े स्तर पर अॉपरेशंस चलाए रखें।

13 लाख सैनिकों वाली भारतीय सेना में बेहद प्रशिक्षित विशेष टुकड़ियां हैं, जिसमें 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज और 5 पैरा एयरबोर्न बटालियन हैं। हर यूनिट में 620 जवान हैं। इन सभी को स्पेशल फोर्स का कमांडो बनने के लिए कड़े शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। कमांडोज की संख्या सीमित होने के कारण उनके लिए खरीदारी की सीमा और लागत भी कम है। उदाहरण से देखें तो 9 एमएम की 500 पिस्तौलें और 1120 असॉल्ट राइफल खरीदने के लिए टेंडर जारी किए गए हैं। अगर यह बेहतर निकले और बाद में और भी काफी बड़े सौदे किए जाएंगे। यूं तो भारतीय सेना के पास कई अत्याधुनिक हथियार हैं, लेकिन 9 जून 2015 को जब भारतीय सेना ने म्यांमार में आतंकी संगठनों पर हमला किया था, तो उस वक्त नई पीढ़ी के हथियारों की कमी खली थी।

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