सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें खुद को इंडियन आर्मी का अफसर बताने वाला व्यक्ति और उसके साथ मौजूद एक महिला मध्य प्रदेश के गढ़ा टोल प्लाज पर टोल भुगताने को लेकर एक कर्मचारी से बहस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उस व्यक्ति ने टोल देने से मना कर दिया और सेना के कर्मियों के लिए तय किए गए नियमों के तहत छूट मांगी। इसके जवाब में टोल कर्मचारी ने कहा कि सेना अधिकारी को छूट केवल ड्यूटी पर रहते हुए ही दी जा सकती है, ड्यूटी से बाहर होने पर नहीं।

यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल ही में कई शिकायतें आईं हैं जिनमें रक्षाकर्मियों सहित अलग-अलग कैटेगरी के वाहनों ने कुछ नियमों का हवाला देते हुए टोल से छूट का दावा किया है। नियमों में स्पष्टता की कमी ने भ्रम को और बढ़ा दिया है। इसकी वजह से टोल गेट पर कर्मचारियों और लोगों के बीच तीखी बहसे हुई हैं।

क्या सेना के कर्मचारियो को टोल शुल्क से भुगतान में छूट हासिल है?

सेना के कर्मचारियों को टोल शुल्क से भुगतान में छूट हासिल है लेकिन इसमें भी कुछ शर्ते हैं। नेशनल हाईवे पर टोल फी (Determination of Rates and Collection) रूल, 2008 के तहत कंट्रोल होती है। नियम 11 के मुताबिक, टोल के भुगतान से छूट कुछ शर्तों के अधीन स्पेसिफिक कैटेगरी के वाहनों और फिजिकली डिसेबिलिटी वाले लोगों पर लागू होती है।

नियम के अनुसार, प्राइवेट वाहन का इस्तेमाल करने वाले सेवारत सेना कर्मियों को टोल छूट केवल तभी दी जाएगी जब वाहन का इस्तेमाल आधिकारिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा हो। इंडियन टोल (Army and Air Force) रूल, 1942 में निर्दिष्ट पास पेश करने पर रक्षा कर्मियों को छूट दी जाती है।

इस घटना के जवाब में एनएचएआई ने कहा, “एनएचएआई यह साफ करना चाहता है कि नेशनल हाईवे पर टोल छूट और रियायतें नेशनल हाईवे फीस (Determination of Rates and Collection) रूल, 2008 के अनुसार दी जाती हैं। इन नियमों के तहत, सेवारत सेना कर्मियों को छूट तभी दी जाएगी जब वाहन का उपयोग आधिकारिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा हो। नेशनल हाईवे इस्तेमाल करने वाले लोगों को इन अधिसूचित नियमों का पालन करना होगा, पात्र होने पर ही लाभ का दावा करना होगा और संचालन के लिए टोल ऑपरेटरों के साथ सहयोग करना होगा।”

एमओआरटीएच ने 17 जून, 2014 के अपने ऑफिस मेमोरेंडम में यह भी साफ किया था कि इंडियन टोल (Army and Air Force) एक्ट, 1901 के तहत छूट केवल उन व्यक्तियों को उपलब्ध है जो ‘ड्यूटी पर’ हैं और यह रिटायर्ड कर्मचारियों पर लागू नहीं होती है।

यूजर फीस पेमेंट से किन अन्य वाहनों को छूट हासिल है?

2008 के नियमों में यह साफ तौर पर बताया गया था कि 25 प्रकार के व्यक्तियों को ले जाने वाले और उनके साथ यात्रा करने वाले वाहनों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा। इनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश, संसद सदस्य, राज्य विधानसभा सदस्य, सरकार के सचिव, परमवीर चक्र, अशोक चक्र, महावीर चक्र, कीर्ति चक्र से सम्मानित व्यक्ति शामिल हैं।

इसके साथ ही, रक्षा मंत्रालय, केंद्रीय और राज्य सशस्त्र बलों (जिनमें अर्धसैनिक बल और पुलिस शामिल हैं), एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, फायर फाइटिंग डिपार्टमेंट और एनएचएआई या नेशनल हाईवे के निरीक्षण, सर्वेक्षण, निर्माण या संचालन और रखरखाव के लिए ऐसे वाहनों का इस्तेमाल करने वाले किसी अन्य सरकारी संगठन द्वारा आधिकारिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन भी इसमें शामिल हैं। एंबुलेंस, शवयात्रा वाहन और फिजिकली डिसऐबल लोगों को इसमें छूट दी गई है।

क्या कोई रियायती पास भी उपलब्ध है?

जी हां। एनएचएआई के अनुसार, नियम 9 में टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय नॉन कमर्शियल वाहन चलाने वालों के लिए रियायती पास उपलब्ध है। इनमें मासिक पास भी शामिल है। इसमें पात्रता के अनुसार जिला स्तर पर कम दरों पर छूट का भी प्रावधान है।

यह भी पढ़ें: राजमार्गों पर हादसों और लोगों की मौतों में 11 फीसदी की कमी, पांच राज्य सबसे आगे, बदलाव के लिए यह कारक जिम्मेदार

सड़क सुरक्षा से जुड़ी सरकारी पहलों के सकारात्मक नतीजे सामने आने लगे हैं। वर्ष 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) पर सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या में 11 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है। यह जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने गुरुवार को लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों में दी। पढ़ें पूरी खबर…