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Army Day: भारत मां के सपूतों ने जब सांचू में कर दी थी घेरा बंदी, तो छूट गए थे PAK के पसीने, सफेद झंडा लहरा ‘भाग खड़ा’ हुआ था

15 जनवरी को मनाए जाने वाले सैन्य दिवस के अवसर पर पूरा देश थल सेना की वीरता, अदम्य साहस, शौर्य और उसकी कुर्बानी को याद करता है।

Rajasthan, Bikaner, Sanchuराजस्थान के बीकानेर में है 1971 जंग की लोकप्रिय सांचू पोस्ट। (फोटो- भास्कर)

भारतीय सेना की पाकिस्तान के खिलाफ 1965 और 1971 में हुई जंगों की कई कहानियां लोकप्रिय हैं। पूरी जंग में कई जगहों पर भारत ने आसानी से जीत हासिल की। पर कुछ जगहें ऐसी भी थीं, जहां पाकिस्तानी सैनिक शुरुआत में भारत पर भारी पड़ रहे थे। लेकिन बाद में जब भारत ने हमलावर रुख अपनाया तो दुश्मन सेना को उल्टे पांव भागना पड़ा। ऐसी ही कहानी भारतीय सैनिकों के राजस्थान के सांचू में सैन्य पोस्ट बचाने की रही है। बीएसएफ ने सैन्य दिवस की पूर्व संध्या पर 71 जंग में सांचू पोस्ट पर जीत का सीन रिक्रिएट किया।

भारत-पाक के बीच 1965 और 1971 का युद्ध इसी पोस्ट पर लड़ा गया था। 1965 युद्ध से पहले बीकानेर जिले के बॉर्डर बेल्ट में सांचू सबसे बड़ा गांव था। थर्ड आरएसी की चौकियां 25 किलोमीटर पीछे बरसलपुर-रणजीतपुरा गांव में तैनात थीं। 1965 युद्ध के दौरान पाक सेना ने सांचू पर कब्जा कर लिया। तब 3 आरएसी और 13 ग्रेनेडियर के जवानों ने मिलकर चौकी फतह की थी।

बीकानेर सेक्टर में एकमात्र यही पोस्ट है जहां 1971 की लड़ाई भी लड़ी गई थी। 1971 के युद्ध में सांचू पोस्ट से ही भारतीय सेना ने पाकिस्तान को खदेड़ दिया था और बाद में बीएसएफ जवानों ने इस जीत का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान की रनिहाल, बीजनोठ और रुकनपुर पोस्ट कैप्चर की थी। हालांकि, बाद में शिमला समझौते के तहत इन पोस्ट्स पर कब्जा पाकिस्तान को सौंप दिया गया था। बीएसएफ की सांचू पोस्ट का ऐतिहासिक महत्व है। सामरिक दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण पोस्ट है। तारबंदी से मात्र दो किमी की दूरी पर है।

‘ज्यादा थे पाक के सैनिक, मोर्टार-LMG से कर रहे थे हमला’: ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ ने एक स्थानीय अखबार को 1971 युद्ध के पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बताया कि जब हमें बीकमपुर पोस्ट से सांचू पोस्ट जाने का आदेश मिला तो हमने दो रात में ऊंटों से सफर किया और सांचू पहुंचे। वहां से पांच किलोमीटर दूर पाकिस्तान की रनिहाल चौकी थी, जिस पर कब्जा करना था।

“इस दौरान रेकी के लिए भेजे गए अफसर ने खबर दी कि दुश्मन चारों तरफ और उम्मीद से ज्यादा तादाद में है। स्थानीय लोग भी उनके साथ थे। शाम होते ही मेजर अजित सिंह की कंपनी ने पहला हमला कर गोरा धोरा पर कब्जा कर लिया। दुश्मन भाग निकला। अगले हमले के लिए हमने हवाई मदद मांगी, लेकिन नहीं मिल सकी। क्योंकि उस वक्त लोंगेवाला में बड़ी लड़ाई चल रही थी।”

ब्रिगेडियर सिंह ने बताया- “हम हवाई सपोर्ट का इंतजार नहीं कर सकते थे। कमांडर से आदेश लेकर आगे बढ़े, लेकिन दुश्मन को भनक लग गई। उसने एलएमजी गन और मोर्टार से फायर किया। हम आगे बढ़ते रहे और रनिहाल को घेर कर फायर झोंक दिया। दुश्मन घबरा गया। उसने सफेद झंडा दिखा दिया।”

हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है सैन्य दिवस: वर्ष 1949 में आज ही के दिन भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर के स्थान पर तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल के एम करियप्पा भारतीय सेना के कमांडर इन चीफ बने थे। इसीलिए हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। सेना दिवस के अवसर पर पूरा देश थल सेना की वीरता, अदम्य साहस, शौर्य और उसकी कुर्बानी को याद करता है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेना दिवस के अवसर पर देश के सैनिकों को बधाई दी और कहा कि सशक्त, साहसी और संकल्पबद्ध सेना ने हमेशा राष्ट्र का सिर गर्व से ऊंचा किया है। मोदी ने 73वें सेना दिवस के अवसर पर ट्वीट कर कहा, ‘‘मां भारती की रक्षा में पल-पल मुस्तैद देश के पराक्रमी सैनिकों और उनके परिजनों को सेना दिवस की हार्दिक बधाई। हमारी सेना सशक्त, साहसी और संकल्पबद्ध है, जिसने हमेशा देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। समस्त देशवासियों की ओर से भारतीय सेना को मेरा नमन।’’

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