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सरकार के फैसले से सेना में चिंता: वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ बोले- बिन पैसे बंद हो जाएंगे कई प्रोजेक्‍ट

रक्षा बजट में कमी को लेकर वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद ने रक्षा समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। उन्‍होंने बताया कि फंड की कमी के कारण मेक इन इंडिया के तहत शुरू कई परियोजनाओं को बंद करना पड़ा है।

Author नई दिल्‍ली | March 14, 2018 08:13 am
पीएम नरेंद्र मोदी के साथ सेनाध्यक्ष बिपिन रावत। फोटो- पीटीआई।

आम बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए पर्याप्‍त फंड आवंटित न करने पर वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ लेफ्टिनेंट जनरल शरत चंद ने गंभीर चिंता जताई है। उन्‍होंने रक्षा मामलों की समिति के समक्ष मौखिक तौर पर बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए कम फंड की व्‍यवस्‍था करने की शिकायत की है। ‘रिपब्लिक टीवी’ के अनुसार, उन्‍होंने कहा कि फंड की कमी के कारण कई रक्षा परियोजनाएं बंद हो जाएंगी। ले. जनरल ने समिति के समक्ष कहा, ‘बजट 2018-19 से हमारी उम्‍मीदों को झटका लगा है। रक्षा क्षेत्र में अब तक जो हासिल किया गया है, उस लिहाज से इस बजट से निराशा मिली है। कुछ मद (बीई) के लिए आवंटित फंड महंगाई दर के अनुरूप भी नहीं है। इससे कर की भी पूर्ति नहीं हो सकेगी। आधुनिकीकरण के लिए आवंटित 21, 338 करोड़ रुपये की राशि बेहद कम है। इससे तो भुगतान (29,033) को लेकर किए गए वादे को भी पूरा नहीं किया जा सकेगा। आधुनिकीकरण के तहत फिलहाल 125 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा आपात खरीद और अन्‍य मद पर भी खर्च होगा।’ ले. जनरल शरत चंद ने सशस्‍त्र बलों की मौजूदा स्थिति के बारे में भी समिति को जानकारी दी थी। उन्‍होंने कहा, ‘सामान्‍य तौर पर किसी भी आधुनिक आर्म्‍ड फोर्सेज में एक तिहाई उपकरण विंटेज (पुराने), एक ति‍हाई मौजूदा तकनीक की श्रेणी और एक तिहाई सैन्‍य साजो-सामान स्‍टेट ऑफ द आर्ट (अत्‍याधुनिक) होते हैं। जहां तक हमारा सवाल है तो हमारे सशस्‍त्र बलों के पास मौजूद 68 फीसद उपकरण विंटेज श्रेणी के हैं।’

सैन्‍य अधिकारी ने मौखिक शिकायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्‍वाकांक्षी मेक इन इंडिया परियोजना का भी उल्‍लेख किया। ले. जनरल शरत ने कहा, ‘सेना में 25 परियोजनाओं की पहचान मेक इन इंडिया के तौर पर की गई है। हालांकि, सेना के पास इसे पूरा करने के लिए पर्याप्‍त बजट नहीं है। नतीजतन इनमें से कई परियोजनाओं को समय से पहले ही बंद कर दिया गया।’ ले. जनरल शरत चंद ने रक्षा समिति के समक्ष फ्यूचर रेडी कांबैट व्हिकल्‍स (एफआरसीवी) के उत्‍पादन की भी निराशाजनक तस्‍वीर पेश की। उन्‍होंने कहा, ‘…जितना बजट आवंटित किया गया है, इससे एफआरसीवी के उत्‍पादन के काम में कुछ और वर्षों की देरी होगी। मुझे नहीं मालूम क‍ि इसका क्‍या भविष्‍य होगा।’

सैन्‍य अधिकारी ने उत्‍तरी सीमा से लगते इलाकों में आधारभूत संरचना को विकसित करने के लिए भी कम फंड आवंटित करने की बात कही। उन्‍होंने बताया कि सशस्‍त्र बलों के लिए कुल मिलाकर 12,296 करोड़ रुपये की कमी है। बता दें कि डोकलाम में तनातनी के बाद भारत ने उत्‍तरी सीमा पर मौलिक सुविधाओं का विस्‍तार करने की योजना बनाई है। इसके अलावा पाकिस्‍तान से लगते सीमावर्ती इलाकों में तैनात सुरक्षाबलों को अत्‍याधुनिक उपकरण मुहैया कराने की बात कही गई है। मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए ऐसे समय में कम बजट का प्रावधान किया है जब चीन लगातार अपने रक्षा बजट को बढ़ा रहा है। सेना की तरह ही वायुसेना और नौसेना भी अत्‍याधुनिक उपकरणों और विमानों की कमी से जूझ रही है।

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