भारतीय सेना की जनरल कोर्ट मार्शल (जीसीएम) ने महिला अधिकारियों के साथ कथित यौन दुर्व्यवहार और अभद्र व्यवहार के मामले में आर्मी मेडिकल कॉर्प्स (एएमसी) के एक कर्नल को दोषी ठहराते हुए सेना की सेवा से बर्खास्त करने और तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि यह सजा उच्च सैन्य अधिकारियों की मंजूरी मिलने के बाद ही लागू होगी।

आरोपी कर्नल और शिकायत करने वाली दोनों महिला अधिकारी राजस्थान के नसीराबाद स्थित सैन्य अस्पताल में डॉक्टर के रूप में तैनात थे। इनमें एक मेजर और एक कैप्टन रैंक की अधिकारी शामिल हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कर्नल को 97 आर्टिलरी ब्रिगेड मुख्यालय से संबद्ध किया गया था, जहां उनके खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई चली।

24 अक्टूबर 2025 को 97 आर्टिलरी ब्रिगेड के कमांडर द्वारा जारी आरोपपत्र में कर्नल पर सेना अधिनियम के तहत छह आरोप लगाए गए थे। इनमें से पांच आरोपों में उन्हें दोषी पाया गया, जबकि एक आरोप से बरी कर दिया गया। 25 अक्टूबर 2025 को 41 आर्टिलरी डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल आदर्शा वर्मा ने जनरल कोर्ट मार्शल के गठन का आदेश दिया था।

पहला आरोप नवंबर 2022 की एक घटना से जुड़ा था। आरोप था कि कर्नल ने नसीराबाद में एक महिला मेजर को जबरन गले लगाया और उनकी गरिमा भंग करने की कोशिश की। दूसरे आरोप में कहा गया कि मार्च 2023 में उन्होंने उसी महिला मेजर की गर्दन और जांघ को अनुचित तरीके से छुआ। यह भी महिला की मर्यादा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया कृत्य माना गया।

तीसरा आरोप मार्च से अप्रैल 2023 के बीच भेजे गए व्हाट्सऐप संदेशों से जुड़ा था। आरोप के अनुसार कर्नल ने महिला मेजर को यौन संकेत वाले और आपत्तिजनक संदेश भेजे थे। चौथे आरोप में कहा गया कि मार्च 2023 में रात के समय उन्होंने महिला अधिकारी को व्हाट्सऐप पर अश्लील तस्वीर और वीडियो भेजे। इसे सेना के अधिकारी के पद और आचरण के खिलाफ माना गया।

पांचवें आरोप में एक महिला कैप्टन को फरवरी और मार्च 2023 के दौरान यौन संकेत वाले टिप्पणियां और संदेश भेजने का मामला शामिल था। वहीं छठे आरोप में एक अन्य महिला मेजर को ऐसे संदेश भेजने का आरोप था, लेकिन इस मामले में उन्हें दोषी नहीं पाया गया।

जांच के दौरान प्रस्तुत व्हाट्सऐप संदेशों में कर्नल ने खुद को महिला अधिकारी का “ड्रीमी और लस्टी फ्रेंड” बताया था। उन्होंने जल्दी घनिष्ठ दोस्ती करने की बात लिखी, अपना ख्याल रखने का अनुरोध किया और “अफेक्शनट हग्स” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। अप्रैल 2023 के एक संदेश में उन्होंने “हर्शीज किसेज” चॉकलेट का जिक्र करते हुए मजाकिया और कथित रूप से आपत्तिजनक अंदाज में “30 किस” का उल्लेख भी किया था।

दूसरी ओर, आरोपी कर्नल के वकील आनंद कुमार ने कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सुनवाई के दौरान कई प्रक्रियागत अनियमितताएं हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि गवाही के रिकॉर्ड में बदलाव किए गए, सबूतों से छेड़छाड़ हुई और कुछ मूल दस्तावेज नष्ट कर दिए गए। इस संबंध में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) में भी याचिकाएं दायर की गई हैं। बचाव पक्ष का दावा है कि इन कथित खामियों के कारण मुकदमे की निष्पक्षता प्रभावित हुई है।

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आए दिन क्रूरता और स्त्रियों की गरिमा का हनन करने वाले अपराधों के ब्योरे मन को झकझोर देते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट कहती है कि हिंसा और यौन शोषण की घटनाओं में वर्ष 2000 के बाद लगातार वृद्धि हो रही है। यदि पिछले एक दशक के आंकड़े ही निकालकर देखें, तो पता चलता है कि समाज अराजकता और शोषण की राह पर आगे बढ़ रहा है। इसमें वह कथित सभ्य समाज भी है, जो खुद को पढ़ा-लिखा और उच्च मानता है। दूसरों का भरोसा जीतकर धोखा देने या विश्वासघात करने वालों की संख्या भी इस समय बढ़ गई है। ऐसे में किसी पर भी यकीन करना मुश्किल होता जा रहा है। आज एक तरफ समाज में शिक्षा, रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक प्रगति से आम आदमी में खुशहाली लाने की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ समाज में बढ़ती हैवानियत बता रही है कि समाज आज किस दिशा में जा रहा है। राज्य सरकारें आम आदमी की सुरक्षा पहले से बेहतर होने का दावा करती रही हैं, लेकिन बढ़ते अपराध इस दावे को झुठलाते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक