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मित्र देशों के साथ सैन्य साझेदारी पर जोर: सेना प्रमुख

जनरल रावत ने कहा कि हर देश शांति, स्थिरता एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए सशस्त्र बलों या मुझे कहना चाहिए मजबूत सशस्त्र बलों को बनाए रखता है।

Author Published on: October 19, 2019 4:31 AM
थलसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में रक्षा उद्योग से भी अपील की कि वह सशस्त्र बलों को समाधान मुहैया कराए। आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत। (pti photo)

थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को कहा कि भारत पड़ोस के साथ-साथ ‘वृहद क्षेत्र’ में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और सेना ‘किसी भी तरह के उभरते खतरों से निपटने’ के लिए अपने मित्रों के साथ साझेदारी करना जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि हम धीरे-धीरे एक मिलिटरी-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हम सिर्फ अपने सुरक्षाबलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए हथियारों और रक्षा उपकरणों का उत्पादन नहीं कर रहे, बल्कि धीरे-धीरे निर्यातोन्मुखी रक्षा उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं। मौजूदा समय में हमारा रक्षा निर्यात सालाना 11,000 करोड़ रुपए है, जो 2024 तक बढ़कर 35,000 करोड़ रुपए हो जाएगा।’

रक्षा अताशे के चौथे सम्मेलन में जनरल रावत ने कहा, ‘हम केवल आकार के आधार पर ही नहीं, बल्कि हमारे वृहद लड़ाकू अनुभव, हमारी पेशेवर दक्षता और अन्य गुणों के कारण दुनिया के अग्रणी सशस्त्र बलों में से एक हैं।’ इस सम्मेलन में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने अपने संबोधन में समुद्री डकैतों जैसे समुद्री खतरों का हवाला दिया है, जिनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ता है। उन्होंने समुद्री सहयोग बढ़ाने और विश्व में ‘सामूहिक सैन्य दक्षता’ का लाभ उठाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा, ‘हमें एक दूसरे से सीखना होगा।’

इस सम्मेलन में जनरल रावत ने कहा, ‘हम सिर्फ अपने सुरक्षाबलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए हथियारों और रक्षा उपकरणों का उत्पादन नहीं कर रहे, बल्कि धीरे-धीरे एक रक्षा निर्यात उद्योग बन रहे हैं। मौजूदा समय में हमारा रक्षा निर्यात सालाना 11000 करोड़ रुपए है, जो 2024 तक बढ़कर दोगुना से ज्यादा मतलब 35,000 करोड़ रुपए हो जाएगा।’ थलसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में रक्षा उद्योग से भी अपील की कि वह सशस्त्र बलों को समाधान मुहैया कराए।

जनरल रावत ने कहा कि हर देश शांति, स्थिरता एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए सशस्त्र बलों या मुझे कहना चाहिए मजबूत सशस्त्र बलों को बनाए रखता है। उन्होंने कहा, ‘शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सशस्त्र बलों को जब भी बुलाया जाए, वे तब अपने उद्देश्य को पूरा करने में सक्षम हों, इसके लिए आपको एक बहुत दक्ष एवं सशक्त मानवबल, सैनिकों, नौसैन्यकर्मियों और वायुसेनाकर्मियों की जरूरत है। अच्छा प्रशिक्षण और अच्छी गुणवत्ता के हथियार एवं उपकरण जवानों को सशक्त करते हैं।’ इस सम्मेलन में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा कि समुद्री डकैती और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे समुद्री खतरों की ‘अंतरराष्ट्रीय’ प्रकृति है और उन्होंने एक दूसरे की सर्वोत्तम नौसेना कार्यप्रणाली को जानने के लिए ‘सामूहिक सैन्य क्षमता’ को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना

हिंद महासागर क्षेत्र में समान विचारधारा वाली नौसेनाओं के साथ सहयोग और भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘यहां कई सामुद्रिक जोखिम और साझा चुनौतियां हैं। उदाहरण के लिए समुद्री डकैती, जहां हमला एक देश में होता है और जहाज में लदा माल दूसरे देश में पहुंच जाता है। फिर नशीले पदार्थों की तस्करी है, जिसे हम नार्को-आतंकवाद कहते हैं, मानव तस्करी और अवैध मछली पकड़ने का कारोबार भी है। इन सभी का एक अंतरराष्ट्रीय या अंतरक्षेत्रीय चरित्र है।’ उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना दूसरी नौसेनाओं से सीखने और सहयोग करने के लिए तैयार है।

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