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शौर्य चक्र अवार्डी की विधवा का भुगतान रोका, अब सरकार को ब्‍याज भी देना होगा

नायब सूबेदार कुलवंत सिंह साल 2007 में आॅपरेशन रक्षक के दौरान कश्मीर घाटी में हथियार डिपो मेें हुए धमाके में शहीद हुए थे। शहीद कुलवंत सिंह ने अपने कई सा​थियों की जान बचाने में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था।

Author Updated: September 23, 2018 9:18 AM
कश्‍मीर में तैनात भारतीय सेना के जवान। (Photo : Express Archive)

आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल की चंडीगढ़ बेंच ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को आदेश दिया कि सरकार शौर्य चक्र विजेता शहीद की विधवा को ब्याज सहित उसके बकाए की रकम अदा करे। इस राशि को रक्षा खातों के प्रधान नियंत्रक ने साल 2007 से देने से इंकार कर दिया था।

सुखविंदर के पति नायब सूबेदार कुलवंत सिंह साल 2007 में आॅपरेशन रक्षक के दौरान कश्मीर घाटी में हथियार डिपो मेें हुए धमाके में शहीद हुए थे। शहीद कुलवंत सिंह ने अपने कई सा​थियों की जान बचाने में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था। इस हादसे में उनका शव भी बरामद नहीं किया जा सका था। उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से भारत के राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था। ये पुरस्कार उन्हें युद्ध के दौरान वीरता और अदम्य साहस का परिचय देने के लिए दिया गया था।

कुलवंत सिंह की शहादत के बाद सुखविंदर कौर के कागज रक्षा खातों के प्रमुख नियंत्रक के कार्यालय, इलाहाबाद में पहुंचे। यहां पर अकाउंट आॅफिसर्स ने बिना उचित प्राधिकरण के आदेशों के बिना उदार पारिवारिक पेंशन जारी करने से इंकार कर दिया। अकाउंट अफसरों का तर्क था कि सैनिक की मौत आतंकवादी कार्रवाई के दौरान नहीं हुई है। जबकि नियमों के मुताबिक अधिसूचित आॅपरेशनल एरिया में हुई सभी मौतों के मामले में उदारतापूर्ण लाभ देने का नियम है।

इस मामले में सुखविंदर कौर ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्युनल की चंडीगढ़ बेंच में याचिका दायर की थी। इंडियन एक्सप्रेस द्वारा इस खबर को प्रकाशित करने के बाद इस याचिका के बारे में सरकार को जानकारी हुई। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने निजी तौर पर इस स्थिति का संज्ञान लिया था। इसके बाद आनन—फानन में सभी लाभ अकाउंट शाखा द्वारा तुरंत ही जारी कर दिए गए।

आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल बेंच में मामले की सुनवाई रिटायर्ड जस्टिस एमएस चौहान और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल मुनीश सिब्बल ने की। जस्टिस द्वय ने सरकार को निर्देश दिया कि वे शहीद की विधवा को बकाया रकम के अलावा 9 फीसदी का ब्याज भी लौटाएं।

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