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आरिफ मोहम्मद ने दिया सईद को जवाब, कहा- आम नहीं सिर्फ अभिजात मुसलमान महसूस कर रहे अलग-थलग की भावना

राजीव गांधी की सरकार से 1986 में इस्तीफा देने वाले खान ने सईद नकवी की ओर से व्यक्त किए किए विचार का प्रतिवाद किया।

Author नई दिल्ली | July 24, 2016 5:46 PM
पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान।

भारत के आम मुसलमानों में अलग-थलग पड़ने की भावना के बिल्कुल भी नहीं होने के दावा करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने कहा है कि अगर ऐसी कोई भावना है तो वह सिर्फ मुस्लिम समुदाय के अभिजात लोगों में हैं। वरिष्ठ पत्रकार सईद नकवी की पुस्तक ‘बीइंग द अदर: द मुस्लिम इन इंडिया’ के विमोचन के दौरान हाल ही में खान ने इस कथित धारणा को खारिज किया कि देश के मुसलमानों में अलग-थलग पड़ने की भावना बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कुछ है तो उसके लिए इस समुदाय के लोग खुद जिम्मेदार हैं क्योंकि वे अलग पहचान बरकरार रखना चाहते हैं।

शाहबानो मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद संसद में विधेयक लाए जाने का विरोध करते हुए राजीव गांधी की सरकार से 1986 में इस्तीफा देने वाले खान ने सईद नकवी की ओर से व्यक्त किए किए विचार का प्रतिवाद किया। नकवी ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच बढ़ती खाई और अलग-थलग पड़ने की भावना बढ़ने को लेकर चिंता जताई तथा यह भी कहा कि यह माहौल लंबे समय से चला आ रहा है।

नकवी के विचार का प्रतिवाद करते हुए खान ने इस माहौल के लिए मुस्लिम समुदाय के अभिजात लोगों को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि यह होना स्वाभाविक है जब मुस्लिम ‘हम अपना मिल्ली तसखुश :पहचान: बरकरार रखना चाहते हैं’ जैसा नारा लगाएंगे। खान ने कहा कि उच्चतम न्यायालय की ओर से तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के लिए जो फैसला आया उसकी पृष्ठभूमि में मुसलमानों ने यह नारा दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘इस नारे का क्या मतलब है? इसका यह मतलब है कि हम अलग हैं। दूसरा व्यक्ति यह नहीं कह रहा है कि हम अलग हैं लेकिन मैं कह रहा हूं कि मैं अलग हूं।’’ खान ने कहा, ‘‘आम मुसलमानों में अलग-थलग पड़ने की भावना जैसी कोई समस्या नहीं है और वे हमारे देश की उस सभ्यता का हमेशा हिस्सा रहे हैं जो 6000 साल पुरानी है।’’

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