रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि भारत की नई स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन अब भारतीय नौसेना में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने ट्वीट किया, “शब्द नहीं, शक्ति है – अरिदमन!” यह पनडुब्बी भारत की तीसरी स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) है और इसे अरिहंत श्रेणी के प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है।

आईएनएस अरिदमन का सबसे खास पहलू यह है कि यह लगभग 90% स्वदेशी तकनीक से बनाई गई है, जिसमें इसका परमाणु रिएक्टर भी शामिल है। इसे विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर ने विकसित किया है। इस पनडुब्बी की तैनाती से भारत की अंडरवाटर सेकंड-स्ट्राइक क्षमता काफी मजबूत होगी। इसका मतलब है कि यह किसी भी परमाणु खतरे का प्रभावी जवाब दे सकती है और भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति के तहत रणनीतिक मजबूती बढ़ाती है। अरिहंत और अरिघात के साथ अब तीन एसएसबीएन पनडुब्बियों के होने से भारत लगातार समुद्र में निगरानी रख सकेगा।

इसी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के लिए एक और बड़ी पेशकश का जिक्र किया – स्वदेशी उन्नत युद्धपोत आईएनएस तारागिरी। यह युद्धपोत प्रोजेक्ट 17A के तहत विकसित चौथा प्लेटफॉर्म है और इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, मुंबई ने तैयार किया है। यह 6,670 टन का युद्धपोत है और इसका डिजाइन जटिल समुद्री परिस्थितियों में भी सुरक्षित और तेज संचालन के लिए बनाया गया है।

तारागिरी में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है और इसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया गया है। इसमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की हवा में मार करने वाली मिसाइलें और पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल हैं। युद्धक क्षमता के साथ-साथ यह पोत आपदा राहत और मानवीय सहायता मिशनों में भी काम आएगा।

आईएनएस अरिदमन और आईएनएस तारागिरी की नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री शक्ति और सुरक्षा दायरा काफी मजबूत होगा। यह कदम न सिर्फ तकनीकी आत्मनिर्भरता को दिखाता है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूती देता है।

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में ‘सैनिक सम्मान सम्मेलन’ को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान को सख्त लहजे में चेतावनी दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते पाकिस्तान ने कोई हरकत करने की कोशिश की तो इस बार उसे निर्णायक और अभूतपूर्व हमले का सामना करना पड़ेगा। राजनाथ सिंह ने कहा, “पहलगाम हमले के बाद, भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिये महज 22 मिनट में पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। आतंकवाद के खिलाफ भारत के सैन्य इतिहास का यह सबसे बड़ा अभियान था। ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, यह जारी है। मौजूदा हालात में हमारा पड़ोसी कोई भी दुस्साहस कर सकता है। अगर ऐसा कुछ हुआ तो भारत की प्रतिक्रिया अभूतपूर्व और निर्णायक होगी।” पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक