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लोकसभा में पास हुआ मध्यस्थता और सुलह संशोधन बिल 2021, जानिए क्या हैं इसके मायने

मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक पर विपक्षी सांसदों द्वारा दिए गए तर्कों के जवाब दिए।

मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष के सवालों के जवाब दिए। (PTI)

शुक्रवार को लोकसभा ने मध्यस्थता और सुलह संशोधन बिल 2021 पारित कर दिया है। आज मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक पर विपक्षी सांसदों द्वारा दिए गए तर्कों के जवाब दिए। मंत्री ने दावा किया कि कॉन्ट्रैक्ट को लागू करने के मामले में भारत की रैंक 2015 में 186 रैंक से बढ़कर 163 हो गई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कारोबार में सुगमता में भी देश में सुधार हुआ है।

मंत्री ने संशोधन लाने को लेकर विपक्ष की आलोचना का जवाब दिया। विधेयक के मुताबिक एक मध्यस्थ अवॉर्ड दिए जाने के बाद अगर यह पाया जाता है कि मामले में धोखाधड़ी की गई है तो यह अदालत को रोक लगाने का विकल्प देता है।विपक्ष ने सवाल किया कि अगर कोई अवॉर्ड केंद्र सरकार या राज्य सरकार के खिलाफ दिया जाता है तो क्या करदाताओं के हजारों करोड़ पैसे खर्च करना सही है?

मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा,”आज मैं न्यायपालिका से अपील करता हूं कि वह वास्तविक जनहित याचिकाओं – मजदूरों के मुआवजे जैसे मुद्दों को उठाने के लिए अपने विवेक का प्रयोग करें। न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।”

मंत्री ने कहा, “लेकिन एक और बुनियादी बात ये भी है कि शासन को उन लोगों पर छोड़ दिया जाना चाहिए जो निर्वाचित सदस्य हैं और इस सदन के प्रति जवाबदेह हैं।” केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में मध्यस्थता संशोधन विधेयक के पक्ष में अपना तर्क दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र “भारत को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मध्यस्थता के लिए एक बड़ा केंद्र बना देगा”।

उन्होंने कहा कि भारत को संस्थागत मध्यस्थता के लिए एक पूरक की जरूरत है। हम किसी भी राष्ट्रीयता के मध्यस्थों का स्वागत करते हैं। वहीं, लोकसभा में टीडीपी, बीएसपी के सांसदों ने कहा कि भारत में अनुबंधों को लागू करने का एक खराब रिकॉर्ड रहा है।

टीआरएस सांसद नागेश्वर राव ने सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या मध्यस्थता अवॉर्डों के संबंध में प्रस्तावित संशोधन के लिए सरकार के पास धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के सबूत हैं?

सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि केंद्र को “प्रगतिशील” कानून लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर इस मुद्दे पर संसद और अदालतों में टकराव देखा जाता है।

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