कांग्रेस ने अजय राय को हटाकर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष पद का प्रभार आराधना मिश्रा मोना को सौंप दिया है। आराधना मिश्रा कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। कांग्रेस ने इन्हें यूपी की कमान सौंपकर महिला और सवर्ण वोट साधने की कोशिश की है। इसके अलावा, कांग्रेस ने इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर मुस्लिम वोटों को भी साधने की कोशिश की है। इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में आराधना मिश्रा ने अपने अनुभव, प्राथमिकताओं और सपा के साथ संभावित गठबंधन समेत मुद्दों पर बात की।
सवाल- आपने 2027 के चुनावों के ठीक पहले यूपी कांग्रेस की कमान संभाली है। आप अपनी चुनौतियों को किस तरह देखते हैं?
आराधना मिश्रा ने जवाब देते हुए कहा- यह एक बहुत बड़ी चुनौती है। मुझे यह जिम्मेदारी देने के लिए मैं अपनी नेतृत्व मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की आभारी हूँ। मैं कांग्रेस में चार पीढ़ियों की विरासत से आती हूँ। मेरे परदादा और दादा आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सेनानी थे। मेरे पिता प्रमोद तिवारी का राजनीतिक करियर 47 साल का रहा। लेकिन मुझे सीधे चुनावी राजनीति में नहीं लाया गया। मेरा सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ।
मैं 1998 में पंच बनी, जब मैं लगभग 19 साल का थी। 2001 में, मैं ब्लॉक प्रमुख बनी। इसके साथ ही, मैंने राज्य स्तर पर कांग्रेस संगठन में भी काम किया। इसलिए, मैंने राजनीति को जमीनी स्तर से लेकर ऊपर तक देखा है।
सवाल- आपने 2019-2022 के दौरान प्रियंका गांधी के साथ पूरे यूपी का दौरा किया। उस अनुभव ने आपको कैसे बदला?
जवाब- जब प्रियंका गांधी 2019 में यूपी आईं, तो मैं उनके साथ काफी घूमी। उनका मेरे साथ पहले से ही पुराना जुड़ाव था क्योंकि वह अमेठी और रायबरेली की इंचार्ज थीं, जो मेरे चुनाव क्षेत्र के पास हैं। हमारा रिश्ता बहुत मजबूत था।
2019 और 2022 के बीच, मैंने उनके साथ पूरे राज्य का दौरा किया। इससे मुझे कांग्रेस संगठन को करीब से देखने का मौका मिला- इसकी ताकत, इसकी कमजोरियाँ और जमीनी स्तर पर जो काम करने की जरूरत है, उसे समझने का मौका मिला।
उसके बाद मैं कांग्रेस विधायक दल की नेता बनी। इसलिए यह जिम्मेदारी भी उस संगठनात्मक काम का ही एक हिस्सा है जो मैं कई सालों से कर रही हूँ।
सवाल- यूपी कांग्रेस की कमान संभालने वाली एक महिला नेता के तौर पर, आपका रोडमैप क्या होगा?
जवाब- जिम्मेदारी के साथ चुनौतियाँ हमेशा आती हैं। मेरे लिए इसमें कुछ भी नया नहीं है। राजनीति में महिला होने से मुझे अब कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन हाँ, महिलाओं को थोड़ा अधिक काम करना पड़ता है क्योंकि जिम्मेदारियां बहुत होती हैं।
मैं खुशकिस्मत रही हूँ कि मेरी पार्टी की लीडरशिप, खासकर प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी ने इन चुनौतियों को समझा। उन्होंने मुझे आगे बढ़ाया और मेरा साथ दिया।
कांग्रेस हमेशा महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण में विश्वास करती रही है। पार्टी ने देश को पहली महिला प्रधानमंत्री, पहली महिला राष्ट्रपति और उत्तर प्रदेश को पहली महिला मुख्यमंत्री दी। मैं उसी परंपरा की एक और उदाहरण हूँ।
जब प्रियंका गांधी ने 2022 में यूपी में लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ अभियान शुरू किया, तो ये महज शब्द नहीं थे। हमने चुनावों में महिला उम्मीदवारों को 40 प्रतिशत आरक्षण दिया। भाजपा वादे कर सकती है, लेकिन कांग्रेस ने अपने इतिहास से दिखाया है कि वह महिलाओं को नेतृत्व करने का मौका देती है।
सवाल- सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को आपके साथ राज्य कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। आप दोनों के एक साथ काम करने को कैसे देखती हैं?
जवाब- इमरान मसूद एक अनुभवी नेता हैं और उन्होंने प्रदेश में काफी काम किया है। यह एक बड़ा राज्य है और यहां अभी बहुत कुछ करना बाकी है, इसलिए हमें कई लोगों की जरूरत है। मैं उनकी नियुक्ति को टीम को मजबूत करने के तौर पर देखती हूँ। हमें कार्यकर्ताओं तक पहुँचने और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना होगा। यह जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति की नहीं है। हमें सामूहिक रूप से यानी कार्यकारी अध्यक्ष, नए उपाध्यक्षों, वरिष्ठ नेताओं, जिला और राज्य स्तर के नेताओं और पूरे कैडर के साथ काम करने की जरूरत है।
सवाल- संगठन के लिहाज से आपकी फौरी प्राथमिकताएँ क्या हैं?
जवाब- मैं कांग्रेस के हर कार्यकर्ता से जुड़ना चाहती हूँ और जितना हो सके, बूथ स्तर तक जमीनी स्तर पर काम करनी चाहती हूँ। चुनाव जीतने के लिए बूथ का मजबूत होना जरूरी है।
चुनाव में बहुत कम समय बचा है, इसलिए शायद मैं वह सब न कर पाऊँ जो मैं करना चाहती हूँ। लेकिन मेरा एजेंडा बूथ स्तर पर मौजूदा संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत करना और सभी को शामिल करना है- जिला और राज्य स्तर के नेता और वे सभी जो काम करना चाहते हैं।
सवाल- क्या आपको लगता है कि कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन आपके लिए एक और बड़ी चुनौती हो सकती है?
जवाब- जीतने की क्षमता (winnability) सबसे अहम है क्योंकि हम चुनाव जीतने और सरकार बनाने के लिए लड़ रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में हमारा उद्देश्य और मिशन सरकार बनाना और भाजपा सरकार को सत्ता से हटाना है। ऐसे में, चुनाव जीतने की क्षमता न केवल सपा के लिए बल्कि कांग्रेस के लिए भी एक बड़ा पैमाना है।
लेकिन मैं एक बात यहां स्पष्ट करना चाहती हूँ। INDIA गठबंधन UP या राज्य स्तर पर नहीं बना था। यह हमारे केंद्रीय नेतृत्व की पहल पर केंद्रीय स्तर पर बना था। इसलिए, कितनी सीटें होंगी, सीटों का बँटवारा कैसे होगा और गठबंधन की घोषणा कब होगी- यह सब केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा।
UP कांग्रेस टीम लीडर के तौर पर मेरी जिम्मेदारी स्पष्ट है- कांग्रेस कार्यकर्ताओं का सम्मान सुनिश्चित करना, संगठन को मजबूत करना और अधिक से अधिक सीटों पर जीत सुनिश्चित करना। गठबंधन पर काम करते समय इन बातों का ध्यान रखा जाएगा।
सवाल- क्या आप लोकसभा चुनावों की तुलना में विधानसभा चुनावों में गठबंधन को अधिक मुश्किल मुद्दा मानती हैं?
जवाब- 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद, कांग्रेस और सपा कार्यकर्ताओं को INDIA गठबंधन की ताकत का एहसास हुआ। जमीनी स्तर पर हमने दोनों पार्टियों के बीच एक अच्छा नेटवर्क देखा। हालांकि विधानसभा चुनाव में दांव अलग होते हैं क्योंकि इसमें स्थानीय स्तर पर दावेदार अधिक होते हैं। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता ने हमारे (कांग्रेस-सपा) कार्यकर्ताओं को गठबंधन की अहमियत के बारे में और स्पष्टता दी है, और इस बार हम भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
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