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तैयार हो चुकी परियोजनाओं में फ्लैट आधारित रजिस्ट्री की मंजूरी, रियल एस्टेट के लिए साबित हो सकती है संजीवनी

प्राधिकरण ने ऐसी परियोजनाओं को पूर्णता प्रमाण पत्र (ओसी) जारी कर रखी है।

Author Published on: September 19, 2019 11:54 PM
सांकेतिक तस्वीर।

मंदी की मार झेल रहे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए क्रेडाई का फ्लैट आधारित रजिस्ट्री का प्रस्ताव संजीवनी साबित हो सकता है। जिसका फायदा ना केवल फ्लैट खरीदारों को मिलेगा, बल्कि इससे तैयार फ्लैटों की बिक्री में तेजी आएगी। साथ ही प्राधिकरण को बिल्डर पर बकाया रकम मिलेगी और रजिस्ट्री होने से सरकार को स्टांप राजस्व मिलेगा। नोएडा प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक के अजेंडे में इस प्रस्ताव को शामिल किया जाएगा। जानकारों का मानना है यदि इस प्रस्ताव को बोर्ड से मंजूरी मिलती है, तो रियल एस्टेट क्षेत्र में दोबारा तेजी आ सकती है। नोएडा में तमाम ऐसी परियोजनाएं हैं, जहां फ्लैट बनकर पूरी तरह से तैयार हैं लेकिन बिल्डर के पास बकाया भुगतान की एक मुश्त रकम नहीं होने से खरीदारों की रजिस्ट्री कराकर मालिकाना हक देना मुश्किल साबित हो रहा है। प्राधिकरण बोर्ड से मंजूरी मिलने पर ऐसे हजारों की संख्या में फ्लैटों को जल्द गुलजार होने की उम्मीद बंधी है।

रियल एस्टेट जानकारों के मुताबिक शहर में हजारों की संख्या में बगैर बिके और पूरी तरह से तैयार फ्लैट खड़े हैं। प्राधिकरण ने ऐसी परियोजनाओं को पूर्णता प्रमाण पत्र (ओसी) जारी कर रखी है। ओसी जारी होने के मायने है कि फ्लैट या टॉवर पूरी तरह से तैयार है या जो संसाधन युक्त और रहने योग्य है। लेकिन इन परियोजनाओं पर प्राधिकरण का बकाया होने के चलते अधिभोग प्रमाण पत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) नहीं मिला है। बकाया रकम के काफी ज्यादा होने और बिल्डर कंपनियों के पास एक मुश्त उसका इंतजाम नहीं हो पाने की वजह से तैयार परियोजना या टॉवर के फ्लैट बिक नहीं पा रहे हैं।

फ्लैटों के नहीं बिकने से ना तो प्राधिकरण के बकाया का भुगतान बिल्डर कर पा रहा है और रजिस्ट्री नहीं होने से राजस्व भी नहीं मिल रहा है। इसके समाधान के लिए कॉन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डिवेलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई) ने एक प्रस्ताव नोएडा प्राधिकरण को दिया है। जिसके तहत यदि एक परियोजना में 500 फ्लैट तैयार है और जिन्हें ओसी मिल चुकी है।

ऐसी परियोजना का अधिभोग प्रमाण पत्र लेने के लिए बिल्डर कंपनी को प्राधिकरण के 200 करोड़ रुपए का भुगतान है। ऐसे में पूरी बकाया रकम को 500 फ्लैटों पर बांट दिया जाए। यदि प्रत्येक फ्लैट पर बकाया भुगतान की रकम 20 लाख रुपए आती है, तब खरीदार को उस को फ्लैट बेचते ही बिल्डर प्राधिकरण का बकाया 20 लाख रुपए का भुगतान कर देगा।

इस तरह बड़ी संख्या में रेडी टू मूव इन फ्लैटों की चाहत रखने वाले आगे आकर फ्लैट खरीदाने को तैयार हो जाएंगे। साथ ही सरकार को स्टांप ड्यूटी के रूप में राजस्व भी मिलेगा। इसके आलवा राजेश कुमार, विशेषकार्याधिकारी नोएडा के मुताबिक इस प्रस्ताव को आगामी बोर्ड बैठक में रखने की तैयारी है। बोर्ड के फैसले के अनुरूप इस पर काम किया जाएगा।

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