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राष्ट्रपति उम्मीदवार पर आम सहमति के आसार खत्म

भाजपानीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार और दलित नेता रामनाथ कोविंद के मुकाबले मंगलवार को विपक्षी दलों की ओर से हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन का नाम सामने आया। इसे भाजपा के दलित कार्ड के जवाब में विपक्ष का किसान कार्ड बताया जा रहा है।

Author नई दिल्ली | June 21, 2017 01:39 am
NDA के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद ने सोमवार (19 जून) को दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। (Photo-PTI)

आम सहमति से नए राष्ट्रपति के चुनाव के आसार खत्म हो गए हैं। कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने 17 विपक्षी दलों की बैठक 22 जून को बुलाई है, जिसमें उम्मीदवार के नाम का एलान किया जाएगा। भाजपानीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार और दलित नेता रामनाथ कोविंद के मुकाबले मंगलवार को विपक्षी दलों की ओर से हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन का नाम सामने आया। इसे भाजपा के दलित कार्ड के जवाब में विपक्ष का किसान कार्ड बताया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, स्वामीनाथन के अलावा विपक्ष के नेता लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार और पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के नाम भी मंथन कर रहे हैं।  एमएस स्वामीनाथन के नाम पर अगर सहमति बनी तो कांग्रेस पार्टी 22 जून की बैठक के बाद उनसे संपर्क साधेगी। विपक्ष की रणनीतिक सोच यही है कि दलित नेता कोविंद के मुकाबले किसानों का मसीहा कहे जाने वाले स्वामीनाथन कड़ी टक्कर देंगे। पहले कांग्रेस को उम्मीद थी कि शिवसेना स्वामीनाथन के नाम पर समर्थन दे सकती है। लेकिन मंगलवार शाम तक शिवसेना का रुख बदल गया और वह कोविंद का समर्थन करने जा रही है। इससे विपक्षी दलों की उम्मीदों को थोड़ा झटका लगा है। जनता दल (एकी) के नीतीश कुमार सोमवार को ही कोविंद को समर्थन देने का संकेत दे चुके हैं।
बहरहाल कांग्रेस के नेताओं की प्राथमिक सोच यही है कि मैदान में अपना कोई नेता नहीं उतारा जाए। कांग्रेस पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए बड़ा दिल दिखाने के लिए सहयोगियों की पसंद को तवज्जो देना चाहती है। स्वामीनाथन इस फॉर्मूले पर फिट बैठते हैं।

स्वामीनाथन के नाम पर सहमति नहीं बनी तो विकल्प के तौर पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार या पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को मैदान में उतरा जा सकता है। बसपा प्रमुख मायावती भी संकेत दे चुकी हैं कि कोविंद के दलित होने के नाते वे उनका विरोध नहीं कर सकतीं, जब तक की उनसे योग्य उम्मीदवार यूपीए न उतारे। बसपा को साथ रखने के लिए भी विपक्ष स्वामीनाथन के नाम से उम्मीद लगा रहा है। विपक्षी दलों में राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्र्रसाद और माकपा महासचिव सीताराम येचुरी पहले ही कह चुके हैं कि यह विचारधारा की लड़ाई है, न कि व्यक्ति या पद की। ओर कांग्रेस नेता यह मानकर चल रहे हैं कि अंकगणित भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में है। संख्याबल और आंकड़ों पर गौर करें तो यह पूरी तरह से राजग के साथ है। अन्नाद्रमुक, बीजू जनता दल, टीआरएस खुले तौर पर इस शीर्ष संवैधानिक पद के लिए राजग का समर्थन कर चुकी हैं। सत्ता पक्ष के पास करीब 58 फीसद वोट दिख रहे हैं। वहीं, विपक्ष के पास करीब 35 फीसद वोट ही हैं ।

ऐसे में विपक्ष का उम्मीदवार विचारधारा का प्रतीक मात्र होगा। विपक्षी एकता 2019 के आम चुनाव में काम आएगी। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी का कहना है कि भाजपा ने एकतरफा ढंग से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। एक दिन पहले तक भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने भी इस नाम पर सवाल उठाया। पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने यहां तक कहा कि सिर्फ दलित वोटों के लिए कोविंद को चुना गया है। इससे देश को कोई लाभ नहीं होगा। याद रहे, शिवसेना ने यूपीए उम्मीदवार प्रतिभा पाटील और प्रणब मुखर्जी का भी समर्थन किया था।

 

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