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CAA पर मोदी सरकार को झटका, सिखों के शीर्ष धार्मिक संगठन अकाल तख्त ने CAA विरोधी आंदोलन को दिया समर्थन

अकाल तख्त के चीफ ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मुस्लिम नेताओं से मुलाकात के बाद कहा कि "सिख अपने सिद्धांतों के साथ बंधे हैं, जिनके तहत पीड़ितों को अन्याय के साथ खड़ा होने की बात कही गई है।

सिख समुदाय ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों को दिया समर्थन। (फाइल फोटो)

सिख समुदाय के सर्वोच्च संगठन अकाल तख्त ने संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को अपना समर्थन देने का बात कही है। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चीफ जफरुल इस्लाम खान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अकाल तख्त के चीफ ज्ञानी हरप्रीत सिंह से अमृतसर में मुलाकात की थी। इस मुलाकात में मुस्लिम नेताओं ने सीएए के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के लिए सिख समुदाय से समर्थन की मांग की थी।

अकाल तख्त के चीफ ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मुस्लिम नेताओं से मुलाकात के बाद कहा कि “सिख अपने सिद्धांतों के साथ बंधे हैं, जिनके तहत पीड़ितों को अन्याय के साथ खड़ा होने की बात कही गई है। मुस्लिम समुदाय के अन्य संगठनों ने भी हमसे ऐसी ही अपील की थीं। अल्पसंख्यकों में डर और असुरक्षा का माहौल है और यह देश के लिए ठीक नहीं है।”

अकाल तख्त चीफ ने मुस्लिम नेताओं को विभिन्न हिंदू संगठनों से भी संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ समर्थन लेने की बात कही है।

उन्होंने कहा कि ‘मैं उनके (मुस्लिम नेताओं के), सिख नेताओं से समर्थन मांगने की कोशिश की तारीफ करते हैं। इसके साथ ही हमने उन्हें सलाह दी है कि वह हिंदू नेताओं से भी इस मुद्दे पर चर्चा करें, जिस तरह उन्होंने मेरे साथ की है।’

दिल्ली के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक के मुस्लिम नेताओं ने भी सीएए विरोधी आंदोलन के मुद्दे पर समर्थन लेने के लिए अकाल तख्त के चीफ से मुलाकात की है।

अकाल तख्त चीफ से मुलाकात के बाद मुस्लिम नेताओं ने कहा कि हम यहां भारत को सिर्फ एक धर्म के आधार पर बनाने के खिलाफ समर्थन मांगने आए हैं। हमें अकाल तख्त के जत्थेदार ने आश्वासन दिया है कि सिख समुदाय हमेशा निर्बलों के साथ खड़ा है।

बता दें कि एनडीए में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने भी सीएए को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। इसी हफ्ते पंजाब के अमृतसर में हुई एक रैली में शिअद के नेता प्रकाश सिंह बादल ने सरकार से अल्पसंख्यकों को साथ लेकर चलने की बात कही थी। इसके साथ ही सीएए के मुद्दे पर मतभेद के चलते ही शिअद ने दिल्ली चुनाव भी लड़ने से इंकार कर दिया था। हालांकि बाद में दोनों पार्टियों ने सुलह कर ली थी और मिलकर चुनाव प्रचार किया था।

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