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देवबंद: CAA के विरोध में 27 जनवरी से डटी हैं महिलाएं, बोलीं- नहीं मिल रहा दारुल या किसी दल का साथ

प्रदर्शनकारियों ने इस धरने को 'देवबंद सत्याग्रह' नाम दिया, साथ ही कहा कि शाहीन बाग प्रदर्शन उनका 'आइकन' है।

सीएए के खिलाफ देवबंद में विरोध-प्रदर्शन करतीं मुस्लिम महिलाएं। (Express photo by Gajendra Yadav)

दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के देवबंद में स्थित ईदगाह में सैकड़ों महिलाएं नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ डटी हैं। ये जगह दारुल उलूम मदरसे से कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही स्थित है। स्थानीय महिलाएं, जिनमें अधिकर मुस्लिम महिलाएं शामिल हैं, 27 जनवरी से धरने पर बैठी हैं। प्रदर्शनकारियों ने इस धरने को ‘देवबंद सत्याग्रह’ नाम दिया, साथ ही कहा कि शाहीन बाग प्रदर्शन उनका ‘आइकन’ है। प्रदर्शनकारियों ने धरनास्थल पर स्वतंत्रता सेनानियों की कुछ तस्वीरें लगा रखी है, मगर यहां कोई धार्मिक चिन्ह नहीं देखा गया। प्रदर्शन स्थल पर शाम होते ही लगभग 200 महिलाओं का जमावड़ा लगभग एक हजार तक पहुंच जाता है।

जिला प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को एक नोटिस भेजा है, जिसमें उन पर देशद्रोही व्यवहार को प्रोत्साहित करने और शांति को बाधित करने का आरोप लगाया। हालांकि प्रदर्शनकारी अभी भी वहीं जमे हुए हैं। हालांकि प्रदर्शकारियों की शिकायत है कि ना तो स्थानीय नेताओं और ना ही दारुल उलूम की तरफ से सीएए के खिलाफ उनके प्रदर्शन को समर्थन मिला है।

महिलाओं का कहना है कि दारुल उलूम के दो वरिष्ठ मौलवी प्रदर्शनकारियों के साथ मध्यस्थता करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा गठित एक समिति का हिस्सा थे, लेकिन वे महिलाओं से मिलने नहीं आए। प्रदर्शन में शामिल इरम उस्मानी कहती हैं, ‘अगर दारुल उलूम हमसे कहता है कि महिलाएं घर चली जाएं और वो खुद सीएए, एनपीआर और एनआरसी को वापस कराने की जिम्मेदारी लेगा तो हम खुशी से घर लौट जाएंगे।’

हालांकि दारुल उलूम प्रतिनिधियों का कहना है कि मदरसे किसी प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका नहीं निभा सकते। देवबंद मदरसे के प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने कहा कि मदरसे ने सीएए के खिलाफ बयान जारी किया है। इसके साथ ही कहा कि हम संविधान की आत्मा की रक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हैं, जहां भी ये प्रदर्शन हो रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, ‘दारुल उलूम कोई राजनीतिक संस्था नहीं है। हम सिर्फ नैतिक समर्थन दे सकते हैं, मगर प्रदर्शन के किसी भी हिस्से में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले सकते।’

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