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जामिया लाइब्रेरी में मारपीट का दूसरा वीडियो आया सामने, भाजपा नेता बोले- जामिया के ‘दंगाईयों’ ने खुद ही अपनी पहचान जाहिर कर दी

पांच मिनट 25 सेंकेंड के दूसरे क्लिप में लोग हड़बड़ी में विश्वविद्यालय के पुस्तकाल में प्रवेश करते हुए कथित रूप से नजर आ रहे हैं। कुछ ने अपने चेहरे ढंके हुए हैं।

पांच मिनट 25 सेंकेंड के दूसरे क्लिप में लोग हड़बड़ी में विश्वविद्यालय के पुस्तकाल में प्रवेश करते हुए कथित रूप से नजर आ रहे हैं।(वीडियो स्क्रीनशॉट)

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की लाइब्रेरी में मारपीट का एक और वीडियो सामने आया है। जिसमें कथित तौर पर दंगाई परिसर में दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं और कुछ अन्य उन्हें पुलिस से बचा रहे हैं। विशेष पुलिस आयुक्त (खुफिया विभाग) प्रवीर रंजन ने कहा कि यह वीडियो पुलिस के संज्ञान में आया है और वह वर्तमान जांच प्रक्रिया के तहत उसकी भी जांच करेगी। सूत्रों ने बताया कि जेसीसी ने बस 48 सेंकेंड का वीडिया जारी किया किया है जिसमें इस प्रकरण का बस एक ही पक्ष दिखाया गया था। उसने (जेसीसी) दूसरे वीडियो नहीं दिखाये जिनमें दंगाई परिसर में दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं और कुछ अन्य उन्हें पुलिस से बचा रहे हैं।

पांच मिनट 25 सेंकेंड के दूसरे क्लिप में लोग हड़बड़ी में विश्वविद्यालय के पुस्तकाल में प्रवेश करते हुए कथित रूप से नजर आ रहे हैं। कुछ ने अपने चेहरे ढंके हुए हैं। जब ये सभी पुस्तकालय में दाखिल हो जाते हैं तो तब वहां मौजूद लोग मेजों और कुर्सियों से मुख्य द्वार जाम करते हुए देखे जा सकते हैं। इसमें इस घटना के समय और तारीख का ब्योरा नहीं है। पुलिस का कहना है कि वह 15 दिसंबर की इस घटना की अपनी जांच के तहत इस वीडियो को और कुछ घंटे बाद सामने आये अन्य दो वीडियो की जांच करेगी।

जनसत्ता ऑनलाइन वीडियो की पुष्टि नहीं करता है

वहीं,भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने रविवार को दावा किया कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में कथित तौर पर पुलिस की बर्बरता को लेकर जो वीडियो आया है, उसमें यह दिखता है कि पुस्तकालय में वास्तव में ‘पत्थरबाज’ बैठे थे।एक ट्वीट में मालवीय ने वीडियो टैग करके दावा किया कि पुस्तकालय में बैठे छात्रों ने नकाब पहन रखा था और बंद पड़ी किताबों को पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि वे छात्र ‘पूरी तत्परता के साथ दरवाजे की तरफ देख रहे हैं न कि पुस्तकालय में आराम से पढ़ाई कर रहे हैं।’’ मालवीय ने कहा कि पथराव के बाद दंगाईयों ने पुस्तकालय में खुद की पहचान छिपाने का प्रयास नहीं किया? उन्होंने कहा, ‘‘जामिया के दंगाईयों के लिए अच्छा है कि उन्होंने खुद ही अपनी पहचान बता दी।’’

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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