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बिहारः लालू यादव को एक और बड़ी राहत, डोरंडा मामले के बाद 2015 के विवादित बयान को लेकर दर्ज केस में भी राहत

2015 में वैशाली जिले के राघोपुर अंचलाधिकारी के लिखित आवेदन पर गंगाब्रिज थाने में लालू यादव के खिलाफ IPC की धारा 188 के तहत दो समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्यता की भावना पैदा करने को लेकर केस दर्ज किया गया था।

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राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव (फोटो सोर्स: फाइल/PTI)।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट से शुक्रवार को राहत मिली थी। वहीं अब 23 अप्रैल, शनिवार को उन्हें एक विवादित बयान के मामले में भी जमानत मिल गई है। बता दें कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ 2015 बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान विवादित भाषण देने को लेकर हाजीपुर के गंगाब्रिज थाने में शिकायत दर्ज हुई थी।

दरअसल लालू यादव ने 27 सितंबर 2015 को राघोपुर विधानसभा के तेरसिया में चुनावी जनसभा के दौरान अगड़ों और पिछड़ों के बीच निर्णायक लड़ाई को लेकर बयान दिया था। इसको लेकर चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाई और लालू यादव के खिलाफ इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना।

चुनाव आयोग के आदेश पर लालू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। जिसमें वैशाली जिले के राघोपुर अंचलाधिकारी के लिखित आवेदन पर गंगाब्रिज थाने में लालू यादव के खिलाफ IPC की धारा 188 के तहत दो समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा या वैमनस्यता की भावना पैदा करने को लेकर केस दर्ज किया गया था।

बता दें कि इस मामले में लालू यादव ने जमानत की अर्जी लगाई थी। जिसपर शनिवार को हाजीपुर कोर्ट ने जमानत दे दी है। वहीं इससे पहले लालू यादव को डोरंडा कोषागार मामले में भी जमानत मिल गई है। बता दें कि इस मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने लालू यादव को 5 साल की सजा सुनाई थी।

इसके खिलाफ लालू की बीमारी का हवाला देते हुए जमानत के लिए झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हालांकि सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभी लालू की सजा पूरी नहीं हुई है। लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को नजरअंदाज करते हुए 10 लाख रुपए के जुर्माने के साथ उन्हें जमानत दे दी।

गौरतलब है कि चारा घोटाले में डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी का मामला पांचवा और अंतिम था। इसमें बिहार के पूर्व सीएम और बाकी अन्य दोषियों को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट द्वारा फरवरी में सजा सुनाई गई थी। इस केस में 99 दोषियों में से 24 को अपराध मुक्त कर दिया गया था जबकि 40 को 3 साल की सजा सुनाई गई थी।

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